Showing posts with label ग्रहशांति. Show all posts
Showing posts with label ग्रहशांति. Show all posts

सुखी जीवन के मूल मंत्र








१. जो दक्षिण में सिर करके सोता है, वह दीर्घायु होता है |

२.जो पश्चिम दिशा में सिर करके सोता है, मानसिक चिंताएं बढती हैं |

३.जो पूरब दिशा में सिर करके सोता है, बुद्धिमान होता है|

४.जो उत्तर दिशा में सिर करके सोता है ,लाभ और जीवन को कम करता है |

५.जो पूर्व दिशा में मुँह करके भोजन करता है, लम्बा जीवन जीता है


६.भोजन दक्षिण मुख ,न पकाओ न खाओ |

७.पढाई हमेशा उत्तर या पूर्व मुख करके करो, सफलता मिलती है |

८.नहाना पूरब मुख करके ,मंजन पश्चिम मुख करना |

ग्रह:


१.सूर्य :झूठे हाथ सिर पर लगाने से सूर्य खराब |

२.चन्द्र :पानी व्यर्थ फैलाने से चन्द्र खराब |

३.मंगल:क्रोध करने से मंगल खराब |

४.बुध:झूठ बोलने से बुध खराब |

५.गुरु:बड़ों का सम्मान न करने से गुरु खराब |

६.शुक्र :पत्नी या स्त्री का सम्मान न करने से शुक्र खराब|

७.शनि :आलस्य करने से शनी खराब |

८.राहू:चुगली करने से राहू खराब |

९.केतु:किसी भिखारी या भिक्षुक का मजाक उड़ाने केतु खराब|







राहु ग्रह शांत करने के 10 आसान से उपाय


1 :- गुंथे आटे की गोलियां राहु चाव से खाये, जल में डूबी मीन को वट वट रोज़ खिलाये !

2:- गली के सफाई कर्मचारी को पांच या दस का सिक्का देते रहा करें !

3:- कभी कभी अपनी Ego को त्याग कर अपने से निम्नतर काम कर लिया करें मतलब घर की साफ-सफाई ,फ्लश या बाथरूम को Haarpic आदि से साफ करना !

4 :- रसोई में बैठ कर खाना खा लिया करें !

5 :- नारियल लेकर उसका छिलका उतार कर सिर से घूमा  कर उस नारियल को दुर्गा जी के चरणों मे अर्पित कर दे !

6 :- मानसिक रोगियों की यथा सम्भव सहायता करना !

7 :- मूली रात को सिरहाने रख कर सुबह धर्म स्थान में दान करना !

8 :- के बार राहु के कारण रात्रि की नींद हराम हो गयी हो तो लाल तकिया रख कर सोएं !

9 :- ससुराल से सम्बन्ध कभी ना बिगाड़ें !

10:- संयुक्त परिवार (Joint Family ) में रहें और मुखिया बनने की कोशिश  न करें !

सूर्य ग्रह के उपाय व सूर्य ग्रह की शांति


वैदिक ज्योतिष में सूर्य को नवग्रहों का राजा कहा जाता है। सूर्य के प्रभाव से मनुष्य को सम्मान और सफलता मिलती है। सूर्य से शुभ फल की प्राप्ति और अशुभ प्रभाव से बचाव के लिए कई उपाय बताये गए हैं। सूर्य मंत्र, सूर्य यंत्र और सूर्य नमस्कार समेत कई उपायों को करने से लाभ मिलता है। हर दिन नियमित रूप से सूर्य मंत्र उच्चारित करने और सूर्य नमस्कार करने से सकारात्मक ऊर्जा प्राप्त होती है। सूर्य ग्रह सरकारी एवं विभिन्न क्षेत्रों में उच्च सेवा का कारक माना गया है। 

वैदिक ज्योतिष के अनुसार जन्म कुंडली में सूर्य की शुभ स्थिति व्यक्ति को जीवन में उन्नति प्रदान करती है लेकिन यदि सूर्य अशुभ प्रभाव देता है, तो सम्मान की हानि, पिता को कष्ट, उच्च पद प्राप्ति में बाधा, ह्रदय और नेत्र संबंधी रोग होते हैं। जन्म कुंडली में सूर्य से संबंधित किसी भी परेशानी के समाधान के लिए करें सूर्य ग्रह से जुड़े विभिन्न उपाय।

वेश-भूषा एवं जीवन शैली से जुड़े सूर्य के उपाय: 

लाल और केसरिया रंग के वस्त्र धारण करें।

पिता जी, सरकार एवं उच्च अधिकारियों का सम्मान करें।

प्रातः सूर्योदय से पहले उठें और अपनी नग्न आँखों से उगते हुए सूरज का दर्शन करें।

विशेषतः सुबह किये जाने वाले सूर्य के उपाय:

भगवान विष्णु की पूजा करें। 

सूर्य देव की पूजा करें।

भगवान राम की पूजा करें।

आदित्य हृदय स्तोत्र का पाठ

सूर्य के लिये व्रत

सूर्य ग्रह का आशीर्वाद पाने हेतु रविवार को व्रत धारण किया जाता है।

सूर्य के लिये दान करें

सूर्य ग्रह से संबंधित वस्तुओं का दान रविवार को सूर्य की होरा और सूर्य के नक्षत्रों (कृतिका, उत्तरा-फाल्गुनी, उत्तरा षाढ़ा) में प्रातः 10 बजे से पूर्व किया जाना चाहिए।

दान करने वाली वस्तुएँ: गुड़, गेहूँ, तांबा, रूबि माणिक्य, लाल पुष्प, खस, मैनसिल आदि।

सूर्य का यंत्र:

सूर्य ग्रह से शुभ फल पाने के लिए रविवार के दिन सूर्य यंत्रको सूर्य की होरा एवं इसके नक्षत्र में धारण करना चाहिए।

सूर्य के लिये जड़ी:

सूर्य का आशीर्वाद पाने के लिए बेल मूल धारण करें। इस जड़ को रविवार के दिन सूर्य की होरा अथवा सूर्य के नक्षत्र में धारण करना चाहिए।

सूर्य के लिये रुद्राक्ष:

1 मुखी / 3 मुखी / 12 मुखी

एक मुखी रुद्राक्ष धारण करने के लिए मंत्र: 

ॐ ह्रीं नमः।
ॐ यें हं श्रों ये।।

तीन मुखी रुद्राक्ष धारण करने हेतु मंत्र: 
ॐ क्लीं नमः।
ॐ रें हूं ह्रीं हूं।।

बारह मुखी रुद्राक्ष धारण करने हेतु मंत्र: 

ॐ क्रों श्रों रों नमः। 
ॐ ह्रीं श्रीं घृणि श्रीं।।

सूर्य का मंत्र:

सूर्य ग्रह को प्रसन्न करने के लिए आप सूर्य बीज मंत्र का जाप कर सकते हैं। 
मंत्र- ॐ ह्रां ह्रीं ह्रौं सः सूर्याय नम।

वैसे तो सूर्य बीज मंत्र को 7000 बार जपना चाहिए परंतु देश-काल-पात्र सिद्धांत के अनुसार कलयुग में इस मंत्र का (7000x4) 28000 बार उच्चारण करना चाहिए।

आप इस मंत्र का भी जाप कर सकते हैं:

 ॐ घृणि सूर्याय नमः!

नवग्रहों के मंत्रों की शक्ति और उनका प्रयोग


मंत्रों की शक्ति तथा इनका महत्व ज्योतिष में वर्णित सभी रत्नों एवम उपायों से अधिक है। मंत्रों के माध्यम से ऐसे बहुत से दोष बहुत हद तक नियंत्रित किए जा सकते हैं जो रत्नों तथा अन्य उपायों के द्वारा ठीक नहीं किए जा सकते। 

ज्योतिष में रत्नों का प्रयोग किसी कुंडली में केवल शुभ असर देने वाले ग्रहों को बल प्रदान करने के लिए किया जा सकता है तथा अशुभ असर देने वाले ग्रहों के रत्न धारण करना वर्जित माना जाता है क्योंकि किसी ग्रह विशेष का रत्न धारण करने से केवल उस ग्रह की ताकत बढ़ती है, उसका स्वभाव नहीं बदलता। 

इसलिए जहां एक ओर अच्छे असर देने वाले ग्रहों की ताकत बढ़ने से उनसे होने वाले लाभ भी बढ़ जाते हैं, वहीं दूसरी ओर बुरा असर देने वाले ग्रहों की ताकत बढ़ने से उनके द्वारा की जाने वाली हानि की मात्रा भी बढ़ जाती है। इसलिए किसी कुंडली में बुरा असर देने वाले ग्रहों के लिए रत्न धारण नहीं करने चाहिएं।

वहीं दूसरी ओर किसी ग्रह विशेष का मंत्र उस ग्रह की ताकत बढ़ाने के साथ-साथ उसका किसी कुंडली में बुरा स्वभाव बदलने में भी पूरी तरह से सक्षम होता है। इसलिए मंत्रों का प्रयोग किसी कुंडली में अच्छा तथा बुरा असर देने वाले दोनो ही तरह के ग्रहों के लिए किया जा सकता है। 

साधारण हालात में नवग्रहों के मूल मंत्र तथा विशेष हालात में एवम विशेष लाभ प्राप्त करने के लिए नवग्रहों के बीज मंत्रों तथा वेद मंत्रों का उच्चारण करना चाहिए। नवग्रहों के मंत्र निम्नलिखित हैं :

नवग्रहों के मूल मंत्र

सूर्य :      ॐ सूर्याय नम:

चन्द्र :     ॐ चन्द्राय नम:

गुरू :       ॐ गुरवे नम:

शुक्र :      ॐ शुक्राय नम:

मंगल :    ॐ भौमाय नम:

बुध :      ॐ बुधाय नम:

शनि :     ॐ शनये नम:  अथवा  ॐ शनिचराय नम:

राहु :      ॐ राहवे नम:

केतु :     ॐ केतवे नम:

नवग्रहों के बीज मंत्र:

सूर्य :       ॐ ह्रां ह्रीं ह्रौं स: सूर्याय नम:

चन्द्र :      ॐ श्रां श्रीं श्रौं स: चन्द्राय नम:

गुरू :       ॐ ग्रां ग्रीं ग्रौं स: गुरवे नम:

शुक्र :       ॐ द्रां द्रीं द्रौं स: शुक्राय नम:

मंगल :    ॐ क्रां क्रीं क्रौं स: भौमाय नम:

बुध :       ॐ ब्रां ब्रीं ब्रौं स: बुधाय नम:

शनि :     ॐ प्रां प्रीं प्रौं स: शनये नम:

राहु :       ॐ भ्रां भ्रीं भ्रौं स: राहवे नम:

केतु :      ॐ स्त्रां स्त्रीं स्त्रौं स: केतवे नम:


नवग्रहों के वेद मंत्र:

सूर्य :     ॐ आकृष्णेन रजसा वर्त्तमानो निवेशयन्नमृतं मतर्य च

            हिरण्येन सविता रथेना देवो याति भुवनानि पश्यन॥

           इदं सूर्याय न मम॥

चन्द्र :    ॐ इमं देवाSसपत् न ग्वं सुवध्वम् महते क्षत्राय महते ज्येष्ठयाय

            महते जानराज्यायेन्द्रस्येन्द्रियाय इमममुष्य पुत्रमुष्यै पुत्रमस्यै विश एष    

            वोSमी राजा सोमोSस्माकं ब्राह्मणानां ग्वं राजा॥ इदं चन्द्रमसे न मम॥

गुरू :     ॐ बृहस्पते अति यदर्यो अहार्द् द्युमद्विभाति क्रतुमज्जनेषु।

            यददीदयच्छवस ॠतप्रजात तदस्मासु द्रविणं धेहि चित्रम॥

            इदं बृहस्पतये, इदं न मम॥

शुक्र :     ॐ अन्नात् परिस्रुतो रसं ब्रह्मणा व्यपिबत् क्षत्रं पय:।

             सोमं प्रजापति: ॠतेन सत्यमिन्द्रियं पिवानं ग्वं

            शुक्रमन्धसSइन्द्रस्येन्द्रियमिदं पयोSमृतं मधु॥ इदं शुक्राय, न मम।

मंगल :   ॐ अग्निमूर्द्धा दिव: ककुपति: पृथिव्या अयम्।

            अपा ग्वं रेता ग्वं सि जिन्वति। इदं भौमाय, इदं न मम॥

बुध :     ॐ उदबुध्यस्वाग्ने प्रति जागृहित्वमिष्टापूर्ते स ग्वं सृजेथामयं च।

            अस्मिन्त्सधस्थे अध्युत्तरस्मिन् विश्वेदेवा यजमानश्च सीदत॥

            इदं बुधाय, इदं न मम॥

शनि :    ॐ शन्नो देविरभिष्टय आपो भवन्तु पीतये।

             शंय्योरभिस्त्रवन्तु न:। इदं शनैश्चराय, इदं न मम॥

राहु :     ॐ कयानश्चित्र आ भुवद्वती सदा वृध: सखा।

            कया शचिंष्ठया वृता॥ इदं राहवे, इदं न मम॥

केतु :    ॐ केतुं कृण्वन्न केतवे पेशो मर्या अपेशसे।

            समुषदभिरजा यथा:। इदं केतवे, इदं न मम॥


मंत्र जाप के द्वारा सर्वोत्तम फल प्राप्ति के लिए मंत्रों का जाप नियमित रूप से तथा अनुशासनपूर्वक करना चाहिए। वेद मंत्रों का जाप केवल उन्हीं लोगों को करना चाहिए जो पूर्ण शुद्धता एवम स्वच्छता का पालन कर सकते हैं। 

किसी भी मंत्र का जाप प्रतिदिन कम से कम 108 बार जरूर करना चाहिए। सबसे पहले आप को यह जान लेना चाहिए कि आपकी कुंडली के अनुसार आपको कौन से ग्रह के मंत्र का जाप करने से सबसे अधिक लाभ हो सकता है तथा उसी ग्रह के मंत्र से आपको जाप शुरू करना चाहिए।