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शुक्र ग्रह को मजबूत करने के उपाय

शुक्र कब कमजोर होता है : कुंडली में शुक्र कमजोर होता है तो आप के वैवाहिक जीवन में भी बाधाएं उतपन्न होना शुरू हो जाती हैं. कई बार ऐसा होता है कि आप कठिन परिश्रम करते रहते हैं लेकिन बावजूद इसके आप को मनचाही सफलता नहीं मिलती. आप सभी प्रकार के भौतिक सुखों से दूर होने लगता है. शुक्र ग्रह को वृष राशि और तुला राशि का स्वामी माना जाता है

शुक्र को मजबूत करने के लिए क्या पहने :शुक्र को प्रबल करने के लिए हीरा, पुखराज या जरकन रत्न पहन सकते हैं। शुक्र ग्रह को सफेद रंग अत्यधिक प्रिय है। इसलिए सफेद रंग के वस्त्र धारण करना लाभकारी होगा।

शुक्र ग्रह को खुश कैसे करे?

शुक्र को मजबूत करने के लिए भोजन में चीनी, चावल, दूध, दही और घी से बना खाना खाए . शुक्रवार के दिन पूजा के दौरान भगवान शिव की सफेद फूल से पूजा करें. शुक्र ग्रह को मजबूत करने के लिए साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखें . शुक्र ग्रह को सफेद रंग प्रिय है इसलिए संभव हो तो सफेद रंग के वस्त्र धारण करें.


राहु ग्रह शांत करने के 10 आसान से उपाय


1 :- गुंथे आटे की गोलियां राहु चाव से खाये, जल में डूबी मीन को वट वट रोज़ खिलाये !

2:- गली के सफाई कर्मचारी को पांच या दस का सिक्का देते रहा करें !

3:- कभी कभी अपनी Ego को त्याग कर अपने से निम्नतर काम कर लिया करें मतलब घर की साफ-सफाई ,फ्लश या बाथरूम को Haarpic आदि से साफ करना !

4 :- रसोई में बैठ कर खाना खा लिया करें !

5 :- नारियल लेकर उसका छिलका उतार कर सिर से घूमा  कर उस नारियल को दुर्गा जी के चरणों मे अर्पित कर दे !

6 :- मानसिक रोगियों की यथा सम्भव सहायता करना !

7 :- मूली रात को सिरहाने रख कर सुबह धर्म स्थान में दान करना !

8 :- के बार राहु के कारण रात्रि की नींद हराम हो गयी हो तो लाल तकिया रख कर सोएं !

9 :- ससुराल से सम्बन्ध कभी ना बिगाड़ें !

10:- संयुक्त परिवार (Joint Family ) में रहें और मुखिया बनने की कोशिश  न करें !

बच्चे का जन्म किस पाये में हुआ है और उसका फल क्या होगा ?


किसी परिवार में बच्चे का जन्म होना परिवार में वंश वृद्धि का परिचायक है |

बच्चे के जन्म के साथ ही बच्चे की स्वस्थता जानने के उपरांत सबसे पहले सबका यही प्रश्न होता है कि बच्चे का जन्म किस पाये में हुआ है ? शास्त्रों में मुख्य रूप से चार पायों का वर्णन है :-

1. चांदी का पाया 
2. ताँबे का पाया
3. सोने का पाया 
4. लोहे का पाया

हर पाये में जन्मे बालक का शुभाशुभ फल भिन्न होता है l बालक/बालिका का जन्म किस पाये में हुआ है ये निम्न विधि से आसानी से जाना जा सकता है l

जन्म पत्रिका में, लग्न से जातक का चन्द्रमा किस भाव में है ये देखा जाता है..

जन्म लग्न से जातक का चन्द्रमा, यदि पहले, छठे या ग्यारहवें भाव में हो तो बच्चे का जन्म "सोने के पाये" में हुआ है l

यदि जातक का जन्म चंद्र लग्न से भाव.. दो, पांच या नौवें में है तो बच्चे का जन्म चाँदी के पाये में हुआ है l

जन्म लग्न से ज.चन्द्रमा यदि "तीसरे, सातवें या दसवें भाव" में हो तो बच्चे का जन्म "ताम्बे के पाये" में हुआ है l

जन्म लग्न से जातक का चन्द्रमा यदि चौथे, आठवें या बारहवें भाव में.. "मोक्ष-∆" में हो तो बच्चे का जन्म लोहे के पाये में हुआ है l

इस तरीके से कुंडली में देखकर आसानी से बताया जा सकता है की बच्चे का जन्म किस पाये में हुआ है l अब प्रश्न है कि...

किस पाये का क्याँ फल होता है?

"चाँदी के पाये" में अगर बच्चेका जन्म हुआ है तो *बच्चा परिवार में सुख समृद्धि लेकर आता है l बच्चा सुखों में पलता है l परिवार का मान सम्मान में वृद्धि होती है l माता पिता की तरक्की होती है l

अगर बच्चा "सोने के पाये" में पैदा हुआ है तो, बालक "चिंता-दायक" ज्यादा शुभ नहीं है l ऐसा "बच्चा रोगी" होता है तथा "बचपन में ही इस बच्चे की स्वास्थ समस्या, दवाईयाँ शुरू हो जाती हैं l "परिवार की शुखशान्ति भंग होती है l" जातक के पिता को, शत्रुओं का सामना करना पड़ता है और धन की हानि भी हो सकती है l

इसकी शांति के लिए बच्चे के वजन के बराबर गेंहू का दान करना चाहिए l अगर संपन्न हो तो सोने का दान भी किया जा सकता है l

ताम्बे के पाये में उत्पन्न बच्चा, "पिता के व्यापार में वृद्धि, "लक्ष्मि- पति" बनाता है और परिवार में सुख-समृद्धि लेकर आता है l

लोहे के पाये में पैदा हुआ बच्चा परिवार के लिए "भारी कष्टदायक" होता है l बच्चा कुछ़ रोगी रहता है l पिता के लिए बच्चा विशेषतया भारी होता है l परिवार में कोई शोकप्रद घटना भी होती है l

इस लिए, यदी किसि जातक का लोहे के पाये में जन्म हो तो माता-पिताको, परिवारजन सह, बच्चे के बचपनमें ही शास्त्रानुसार अावश्यक उचित "ग्रह-शांति" करवानी चाहिए

घर के वास्तुदोष से अचानक हो सकती है मौत, यह हैं उपाय


वास्तु घर:

वास्तु शास्त्र में दिशाओं का विशेष महत्व बताया गया है। सही दिशा में सही चीजें रखने से शुभ फल की प्राप्ति होती है। वहीं अगर घर के वास्तु में दोष हो, तो इसका बुरा प्रभाव भी घर में रहने वाले हर सदस्य पर पड़ता है। वास्तु शास्त्र के अनुसार नैऋत्य दिशा यानि पश्चिम- दक्षिण में दोष होता है इसका परिणाम घातक रहता है। इस दिशा में दोष होने पर वहां रहने वालों मनुष्यों की अकाल मृत्यु होने की सबसे ज्यादा संभावना रहती है। इसलिए इस दोष को तुरंत ठीक करने के उपाय जान लें।

ये हैं उपाय:

जिस घर में पूर्व दिशा में मुख्य दरवाजा या फिर पूर्व-दक्षिण दिशा में एक और दरवाजा हो और घर का ईशान कोण क्षतिग्रस्त हो, तो वहां पर रहने वाले सदस्यों की हार्ट अटैक, सड़क दुर्घटना या आत्महत्या यानी अकाल मौत की संभावना बढ़ जाती है।

अगर घर के उत्तर-पश्चिम हिस्से में कुआं और पश्चिम-नैऋत्य दिशा में कोई बरामदा या दरवाजा हो, तो उस घर के स्वामी की आत्महत्या करने की संभावना बनी रहती है।

जिस घर के पश्चिम में चहारदीवारी की दक्षिण-नैऋत्य दिशा में फाटक हो। ऐसे घर में रहने वाले लोग आत्महत्या कर सकते हैं।

नहीं हो रहा विवाह तो अपनाए ये उपाय


विवाह के उपाय (Remedies and Upay to avoide late marriage)

समय पर अपनी जिम्मेदारियों को पूरा करने की इच्छा के कारण माता-पिता व भावी वर-वधू भी चाहते है कि अनुकुल समय पर ही विवाह हो जायें. कुण्डली में विवाह विलम्ब से होने के योग होने पर विवाह की बात बार-बार प्रयास करने पर भी कहीं बनती नहीं है. इस प्रकार की स्थिति होने पर शीघ्र विवाह के उपाय करने हितकारी रहते है. उपाय करने से शीघ्र विवाह के मार्ग बनते है. तथा विवाह के मार्ग की बाधाएं दूर होती है.

उपाय करते समय ध्यान में रखने योग्य बातें (Precautions while doing Jyotish remedies)

1. किसी भी उपाय को करते समय, व्यक्ति के मन में यही विचार होना चाहिए, कि वह जो भी उपाय कर रहा है, वह ईश्वरीय कृ्पा से अवश्य ही शुभ फल देगा.

2. सभी उपाय पूर्णत: सात्विक है तथा इनसे किसी के अहित करने का विचार नहीं है.

3. उपाय करते समय उपाय पर होने वाले व्ययों को लेकर चिन्तित नहीं होना चाहिए.

4. उपाय से संबन्धित गोपनीयता रखना हितकारी होता है.

5. यह मान कर चलना चाहिए, कि श्रद्धा व विश्वास से सभी कामनाएं पूर्ण होती है.

आईये शीघ्र विवाह के उपायों को समझने का प्रयास करें (Remedies for a late marriage)

1. हल्दी के प्रयोग से उपाय - विवाह योग लोगों को शीघ्र विवाह के लिये प्रत्येक गुरुवार को नहाने वाले पानी में एक चुटकी हल्दी डालकर स्नान करना चाहिए. भोजन में केसर का सेवन करने से विवाह शीघ्र होने की संभावनाएं बनती है.

2. पीला वस्त्र धारण करना - ऎसे व्यक्ति को सदैव शरीर पर कोई भी एक पीला वस्त्र धारण करके रखना चाहिए.

3. वृ्द्धो का सम्मान करना - उपाय करने वाले व्यक्ति को कभी भी अपने से बडों व वृ्द्धों का अपमान नहीं करना चाहिए.

4. गाय को रोटी देना - जिन व्यक्तियों को शीघ्र विवाह की कामना हों उन्हें गुरुवार को गाय को दो आटे के पेडे पर थोडी हल्दी लगाकर खिलाना चाहिए. तथा इसके साथ ही थोडा सा गुड व चने की पीली दाल का भोग गाय को लगाना शुभ होता है.

5. शीघ्र विवाह प्रयोग - इसके अलावा शीघ्र विवाह के लिये एक प्रयोग भी किया जा सकता है. यह प्रयोग शुक्ल पक्ष के प्रथम गुरुवार को किया जाता है. इस प्रयोग में गुरुवार की शाम को पांच प्रकार की मिठाई, हरी ईलायची का जोडा तथा शुद्ध घी के दीपक के साथ जल अर्पित करना चाहिये. यह प्रयोग लगातार तीन गुरुवार को करना चाहिए.

6. केले के वृ्क्ष की पूजा - गुरुवार को केले के वृ्क्ष के सामने गुरु के 108 नामों का उच्चारण करने के साथ शुद्ध घी का दीपक जलाना चाहिए. अथा जल भी अर्पित करना चाहिए.

7. सूखे नारियल से उपाय - एक अन्य उपाय के रुप में सोमवार की रात्रि के 12 बजे के बाद कुछ भी ग्रहण नहीं किया जाता, इस उपाय के लिये जल भी ग्रहण नहीं किया जाता. इस उपाय को करने के लिये अगले दिन मंगलवार को प्रात: सूर्योदय काल में एक सूखा नारियल लें, सूखे नारियल में चाकू की सहायता से एक इंच लम्बा छेद किया जाता है. अब इस छेद में 300 ग्राम बूरा (चीनी पाऊडर) तथा 11 रुपये का पंचमेवा मिलाकर नारियल को भर दिया जाता है. यह कार्य करने के बाद इस नारियल को पीपल के पेड के नीचे गड्डा करके दबा देना. इसके बाद गड्डे को मिट्टी से भर देना है. तथा कोई पत्थर भी उसके ऊपर रख देना चाहिए. यह क्रिया लगातार 7 मंगलवार करने से व्यक्ति को लाभ प्राप्त होता है. यह ध्यान रखना है कि सोमवार की रात 12 बजे के बाद कुछ भी ग्रहण नहीं करना है.

8. मांगलिक योग का उपाय (Remedies for Manglik Yoga) - अगर किसी का विवाह कुण्डली के मांगलिक योग के कारण नहीं हो पा रहा है, तो ऎसे व्यक्ति को मंगल वार के दिन चण्डिका स्तोत्र का पाठ मंगलवार के दिन तथा शनिवार के दिन सुन्दर काण्ड का पाठ करना चाहिए. इससे भी विवाह के मार्ग की बाधाओं में कमी होती है.

9. छुआरे सिरहाने रख कर सोना - यह उपाय उन व्यक्तियों को करना चाहिए. जिन व्यक्तियों की विवाह की आयु हो चुकी है. परन्तु विवाह संपन्न होने में बाधा आ रही है. इस उपाय को करने के लिये शुक्रवार की रात्रि में आठ छुआरे जल में उबाल कर जल के साथ ही अपने सोने वाले स्थान पर सिरहाने रख कर सोयें तथा शनिवार को प्रात: स्नान करने के बाद किसी भी बहते जल में इन्हें प्रवाहित कर दें.

कुछ ग्रहों के अशुभ प्रभाव के कारण कन्या के विवाह में विलंब हो तो इस प्रकार के उपाय स्वयं कन्या द्वारा करवाने से विवाह बाधाएं दूर होती है –

★किसी भी माह की शुक्ल पक्ष की चतुर्थी से चांदी की छोटी कटोरी में गाय का दूध लेकर उसमें शक्कर एवंउबलेहुए चांवल मिलाकर चंद्रोदय के समय चंद्रमा को तुलसी की पत्ती डालकर यह नेवैद्य बताएं व प्रदक्षिणा करें, इस प्रकार यह नियम 45 दिनों तक करें ,45 ङ्घह्न दिन पूर्ण होने पर एक कन्या को भोजन करवाकर वस्त्र और मेंहदी दान करें, ऐसाकरने से सुयोग्य वर की प्राप्ति होकर शीघ्र मांगलिक कार्य संपन्न होता है ।

★गुरूवार के दिन प्रात:काल नित्यकर्म से निवतृत होकर हल्दीयुक्त रोटियां बनाकर प्रत्येक रोटी पर गुड़ रखें व उसे गाय को खिलाएं ।7 गुरूवार नियमित रूप से यह विधि करने से शीघ्र विवाह होता है ।

★मंगलवार केदिन देवी -मंदिर में लाल गुलाब का फूल चढ़ाएं पूजन करें एवं मंगलवार का व्रत रखें । यह कार्य नौ मंगलवार तक करे । अंतिम मंगलवार को9 ख़् वर्ष की नौ कन्याओं को भोजन करवाकर लाल वस्त्र, मेंहदी एवं यथाशक्ति दक्षिण दें, शीघ्र फल की प्राप्ति होगी ।

★कात्यायनि महामाये महायोगिन्यधीश्वरि नंद गोपसुतं देविपतिं में कुरू ने नम: । माँ कात्यायनि देवी या पार्वती देवी के फोटो को सामने रखकर जो कन्या पूजन कर इस कात्यायनि मंत्र की 1 माला का जाप प्रतिदिन करती है , उस कन्या की विवाह बधा शीघ्र दूर होती है ।

★यदि कन्या की शादी में कोई रूकावट आ रही हो तो पूजा वाले 5 नारियल लें ! भगवान शिव की मूर्ती या फोटो के आगे रख कर “ऊं श्रीं वर प्रदाय श्री नामः” मंत्र का पांच माला जाप करें फिर वो पांचों नारियल शिव जी के मंदिर में चढा दें ! विवाह की बाधायें अपने आप दूर होती जांयगी !

प्रत्येक सोमवार को कन्या सुबह नहा-धोकर शिवलिंग पर “ऊं सोमेश्वराय नमः” का जाप करते हुए दूध मिले जल को चढाये और वहीं मंदिर में बैठ कर रूद्राक्ष की माला से इसी मंत्र का एक माला जप करे ! विवाह की सम्भावना शीघ्र बनती नज़र आयेगी

विवाह बाधा दूर करने के लिए:

कन्या को चाहिए कि वह बृहस्पतिवार को व्रत रखे और बृहस्पति की मंत्र के साथ पूजा करे। इसके अतिरिक्त पुखराज या सुनैला धारण करे। छोटे बच्चे को बृहस्पतिवार को पीले वस्त्र दान करे। लड़के को चाहिए कि वह हीरा या अमेरिकन जर्कन धारण करे और छोटी बच्ची को शुक्रवार को श्वेत वस्त्र दान करे।

‬ग्रहों की अनिष्टदायक स्थिति को शुभ मंगलमय बनाने के लिए कुछ सरल उपाय करें तो निश्चित ही शुभदायक परिणाम मिलते हैं।

1. सुबह उठते ही माता-पिता, गुरु एवं वृद्धजनों को प्रणाम नित्य करें तथा उनका आशीर्वाद प्राप्त करके नित्य अच्छे फल प्राप्त करें।

2. रोज गाय को गुड़-रोटी दें। और प्रणाम करे

3. रोज कुत्तों को रोटी खिलानी चाहिए। पक्षियों को दाना भी डालें तो शुभ है।

4. यदि आपके शहर या गांव के पास तालाब, नदी या सागर हो तो उसमें कछुए और मछलियों को आटे की गोलियां बनाकर खिलानी चाहिए।

5. घर आए अतिथियों की सेवा निष्काम भाव से करनी चाहिए तथा उनकी ओर से प्राप्त संदेश ध्यान से सुनकर, योग्य संदेश का अनुकरण करना चाहिए।

6. हमेशा प्रात:काल भोजन बनाते समय माताएं-बहनें एक रोटी अग्निदेव के नाम से बनाकर घी तथा गुड़ से बृहस्पति भगवान को अर्पित करें इससे घर में वास्तु पुरुष को भोग लग जाता है। इससे अन्नपूर्णा भी प्रसन्न रहती है।

7. प्रात: स्नान करके भगवान शंकर के शिवलिंग पर जल चढ़ाकर 108 बार 'ॐ नम: शिवाय' मंत्र की पूजा से युक्त दंडवत नमस्कार करना चाहिए।

8. स्नान के पश्चात प्रात: सूर्यनारायण भगवान को लाल पुष्प चढ़ाकर बार-बार हाथ जोड़कर नमस्कार करना चाहिए।

9. प्रत्येक शनिवार को पीपल के वृक्ष पर जल, कच्चा दूध थोड़ा चढ़ाकर, सात परिक्रमा करके सूर्य, शंकर, पीपल- इन तीनों की विधिपूर्वक पूजा करें तथा चढ़े जल को नेत्रों में लगाएं और पितृ देवाय नम: भी 4 बार बोलें तो राहु-केतु, शनि-पितृ दोष का निवारण होता है।

10. प्रात:काल सूर्य के सम्मुख बैठकर एकांत में भगवत भजन या मंत्र या गुरु मंत्र का जप करना चाहिए।

11. यथाशक्ति कुछ न कुछ गरीबों को दान देना चाहिए।

12. सेवा के बाद यश प्राप्ति की भावना नहीं रखें। 

13. अभक्ष्य वस्तुओं को कभी ग्रहण नहीं करना चाहिए।

14. रविवार या मंगलवार को कर्ज नहीं लें। लेना पड़े तो बुधवार को कर्ज लें। मंगलवार को कर्ज चुकाना चाहिए

15. पितृ दोष से मुक्ति के लिए नित्य महागायत्री के महामंत्र की नियमित साधना करें तथा श्री रामेश्वर धाम की यात्रा कर वहां पूजन करें।

हथेली में यह दस रेखाएं दिलाती हैं अचानक ही धन लाभ:

हथेली में यह दस रेखाएं दिलाती हैं अचानक ही धन लाभ यहां ऐसी दस रेखाओं के बारे में जानिए जो आपकी हथेली में भी हैं तो आपको अचानक ही धन लाभ मिलेगा। जानिए किस उम्र में दिलाएंगी यह रेखाएं लाभ। जिस व्यक्ति की हथेली में शनि पर्वत पर त्रिभुज का चिन्ह होता है उसे जीवन में अचानक ही धन लाभ मिलता है। 45 वर्ष की उम्र इन्हें अचानक प्रसिद्घि और बड़ा धन लाभ प्राप्त होता है। जिनकी हथेली में चन्द्रपर्वत से निकलकर भाग्य रेखा शनि पर्वत तक पहुंचती है उन्हें शादी के बाद अचानक ही धन का लाभ प्राप्त होता और इनकी आर्थिक स्थिति बेहतर हो जाती है। जिस व्यक्ति की हथेली में जीवन रेखा से निकलकर कुछ रेखाएं गुरु पर्वत तक आती हैं उन्हें भी बिना उम्मीद बड़ा लाभ मिलता है। मस्तिष्क रेखा से निकलकर कोई रेखा शनि पर्वत पर आती है तो व्यक्ति को 35 साल की उम्र के बाद विशेष धन लाभ प्राप्त है, जिसकी व्यक्ति को उम्मीद भी नहीं रहती है। हस्तरेखा विज्ञान के अनुसार अनामिका व मध्यमा उंगली पर कहीं भी वर्ग का निशान हो तो शुभ होता है। इससे व्यक्ति को अचानक धन लाभ प्राप्त होता है। जिनकी हथेली में हृदय रेखा, भाग्य रेखा और सूर्य रेखा से मिलकर त्रिभुज का चिन्ह बनता है उन्हें भी जीवन में अकस्मात ही धन लाभ मिलता रहता है। हथेली में गुरू पर्वत पर वर्ग का चिन्ह मौजूद है तो यह भी अचानक धन प्राप्ति का योग बनाता है। हथेली में जीवन रेखा के अंत में अगर वर्ग का चिन्ह है तो यह भी अचानक धन प्राप्ति का सूचक होता है। जिनकी हथेली में मणिबंध से शुरू होकर कोई रेखा बुध पर्वत यानी छोटी उंगली तक आती है तो यह उनके लिए अचानक धन प्राप्ति का योग बनाता है। जिनके हाथों में तर्जनी उंगली और सबसे छोटी यानी कनिष्ठिका उंगली एक बराबर होती है वह भी अचानक धन प्राप्त करते हैं।

: !! पुत्र प्राप्ति के कुछ सिद्ध उपाय !!

यदि किसी व्यक्ति को संतान प्राप्ति में समस्या आ रही हो, तो ऐसे व्यक्ति इस लेख में लिखे गये सरल उपायों को अपना कर संतान की प्राप्ति अति ही सहजता के साथ कर सकते हैं। किंतु उपायों को अति सावधानी से व श्रद्धा के साथ करना अति आवश्यक होता है !!

!! उपाय निम्नवत हैं !!

दंपति को गुरुवार का व्रत रखना चाहिए !! गुरुवार के दिन पीले वस्त्र धारण करें, पीली वस्तुओं का दान करें यथासंभव पीला भोजन ही करें !!

माता बनने की इच्छुक महिला को चाहिए गुरुवार के दिन गेंहू के आटे की 2 मोटी लोई बनाकर उसमें भीगी चने की दाल और थोड़ी सी हल्दी मिलाकर नियमपूर्वक गाय को खिलाएं !!

शुक्ल पक्ष में बरगद के पत्ते को धोकर साफ करके उस पर कुंकुम से स्वस्तिक बनाकर उस पर थोड़े से चावल और एक सुपारी रखकर सूर्यास्त से पहले किसी मंदिर में अर्पित कर दें और प्रभु से संतान का वरदान देने के लिए प्रार्थना करें निश्चय ही संतान की प्राप्ति होगी !!

गुरुवार के दिन पीले धागे में पीली कौड़ी को कमर में बांधने से संतान प्राप्ति का प्रबल योग बनता है !!

माता बनने की इच्छुक महिला को पारद शिवलिंग का रोजाना दूध से अभिषेक करें उत्तम संतान की प्राप्ति होगी !!

हर गुरुवार को भिखारियों को गुड़ का दान देने से भी संतान सुख प्राप्त होता है !!

पूर्वाफाल्गुनी नक्षत्र में आम की जड़ को लाकर उसे दूध में घिसकर स्त्री को पिलाएं यह सिद्ध एंवम परीक्षित प्रयोग है !!

रविवार को छोड़कर अन्य सभी दिन निसंतान स्त्री यदि पीपल पर दीपक जलाए और उसकी परिक्रमा करते हुए संतान की प्रार्थना करें उसकी इच्छा अति शीघ्र पूरी होगी !!

श्वेत लक्ष्मणा बूटी की 21 गोली बनाकर उसे नियमपूर्वक गाय के दूध के साथ लेने से संतान सुख की अवश्य ही प्राप्ति होती है !!

उत्तर फाल्गुनी नक्षत्र में नीम की जड़ लाकर सदैव अपने पास रखने से निसंतान दम्पति को संतान सुख अवश्य प्राप्त होता है !!

नींबू की जड़ को दूध में पीसकर उसमे शुद्ध देशी घी मिला कर सेवन करने से पुत्र प्राप्ति की संभावना बड़ जाती है !!

पहली बार ब्याही गाय के दूध के साथ नागकेसर के चूर्ण का लगातार 7 दिन सेवन करने से संतान पुत्र उत्पन्न होता है !!

सवि ( सांवा) का भात और मुंग की दाल खाने से बांझ पन दूर होता है और पुत्र रत्न की प्राप्ति होती है !!

गर्भ का जब तीसरा महीना चल रहा हो तो गर्भवती स्त्री को शनिवार को थोडा सा जायफल और गुड़ मिलाकर खिलाने से अवश्य ही पुत्र रत्न की प्राप्ति होगी !!

पुराने चावल को धोकर भिगो दें बनाने से पहले उसके पानी को अलग करके उसमें नीबूं की जड़ को महीन पीसकर उस पानी को स्त्री पी कर अपने पति से सम्बन्ध बनाये वह स्त्री कन्या को जन्म देगी !!

संतान प्राप्ति के लिए पति-पत्नी दोनों को रामेश्वरम् की यात्रा करनी चाहिए तथा वहां सर्प-पूजन करवाना चाहिए। इस कार्य को करने से संतान-दोष समाप्त होता है !!

स्त्री में कमी के कारण संतान होने में बाधा आ रही हो, तो लाल गाय व बछड़े की सेवा करनी चाहिए। लाल या भूरा कुत्ता पालना भी शुभ रहता है !!

यदि विवाह के दस या बारह वर्ष बाद भी संतान न हो, तो मदार की जड़ को शुक्रवार को उखाड़ लें। उसे कमर में बांधने से स्त्री अवश्य ही गर्भवती हो जाएगी !!
जब गर्भ धारण हो गया हो, तो चांदी की एक बांसुरी बनाकर राधा-कृष्ण के मंदिर में पति-पत्नी दोनों गुरुवार के दिन चढ़ायें तो गर्भपात का भय/खतरा नहीं होता !!

यदि बार-बार गर्भपात होता है, तो शुक्रवार के दिन एक गोमती चक्र लाल वस्त्र में सिलकर गर्भवती महिला के कमर पर बांध दें। गर्भपात नहीं होगा !!

जिन स्त्रियों के सिर्फ कन्या ही होती है, उन्हें शुक्र मुक्ता पहना दी जाये, तो एक वर्ष के अंदर ही पुत्र-रत्न की प्राप्ति होगी !!

यदि बच्चे न होते हों या होते ही मर जाते हों, तो मंगलवार के दिन मिट्टी की हांडी में शहद भरकर श्मशान में दबायें !!

 शीघ्र विवाह के सरल एवं आसान उपाय / टोटके:

जन्मकुंडली में कई ऐसे योग होते हैं जिनकी वजह से कोई भी पुरुष या स्त्री विवाह की खुशी से वंचित रह सकते हैं….कई बार ये रूकावट बाहरी बाधाओं की वजह से भी आती हैं. उम्र लगातार बढती जाती है और लाख प्रयास के बाद भी रिश्ते बन नहीं पाते हैं या मनचाहे रिश्तों का तो जैसे आकाल ही पड़ जाता है इस प्रकार की स्थिति होने पर शीघ्र विवाह के उपाय करने में समझदारी रहती है. इन उपाय को करने से शीघ्र विवाह के मार्ग बनते है, तथा विवाह मार्ग की समस्त बाधाएं दूर होती है| यहाँ पर हम कुछ बहुत ही आसान किन्तु अचूक उपाय बता रहे है जिनको सच्चे मन से करने से वर एवं कन्या दोनों को ही निश्चित रूप से मनवांछित लाभ प्राप्त होगा।

1. शीघ्र विवाह के लिए सोमवार को १२०० ग्राम चने की दाल व सवा लीटर कच्चे दूध का दान करें| यह प्रयोग तब तक करते रहना है जब तक कि विवाह न हो जाय|

2. कन्या जब किसी कन्या के विवाह में जाये और यदि वहाँ पर दुल्हन को मेहँदी लग रही हो तो अविवाहित कन्या कुछ मेहँदी उस दुल्हन के हाथ से लगवा ले इससे विवाह का मार्ग शीघ्र प्रशस्त होता है|

3. विवाह वार्ता के लिए घर आए अतिथियों को इस प्रकार बैठाएं कि उनका मुख घर में अंदर की ओर हो, उन्हें द्वार दिखाई न दे।

4.विवाह योग्य युवक-युवती जिस पलंग पर सोते हों उसके नीचे लोहे की वस्तुएं या कबाड़ का सामान कभी भी नहीं रखना चाहिए।

5. यदि विवाह के पूर्व लड़का-लड़की मिलना चाहें तो वह इस प्रकार बैठे कि उनका मुख दक्षिण दिशा की ओर न हो। 

6. कन्या सफेद खरगोश को पाले तथा अपने हाथ से उसे भोजन के रूप में कुछ दे|

7. कन्या के विवाह की चर्चा करने उसके घर के लोग जब भी किसी के यहाँ जायें तो कन्या खुले बालों से,लाल वस्त्र धारण कर हँसते हुए उन्हें कोई मिष्ठान खिला कर विदा करे| विवाह की चर्चा सफल होगी|

8. पूर्णिमा को वट वृक्ष की १०८ परिक्रमा देने से भी विवाह बाधा दूर होती है| 

9. गुरूवार को वट वृक्ष, पीपल, केले के वृक्ष पर जल अर्पित करने से विवाह बाधा दूर होती है|

मन्त्र:

गौरी आवे ,शिव जो ब्यावे.अमुक का विवाह तुरंत सिद्ध करेँ,
देर ना करेँ, जो देर होए , तो शिव को त्रिशूल पड़े,
गुरु गोरखनाथ की दुहाई फिरै ।। 

अमुक के स्थान पर जिस लड़की का विवाह न हो रहा हो उसका नाम लिख सकते है !

10.यदि विवाह की आयु होने पर भी कन्या के विवाह में वाधा आ रही हो तो शुक्रवार की रात्रि में 8 सूखे छुआरो को जल में अच्छी तरह उबालकर जल सहित अपने सिरहाने पर रखकर सोएं और उसे अगले दिन शनिवार को बहते जल में प्रवाहित कर दे। इस उपाय को करने से विवाह में आने वाली बाधाएं दूर होती है। 

11.यदि मंगल दोष के कारण (मंगली होने पर )किसी भी लड़के या लड़की के विवाह में विलंब हो रहा हो तो उसके कमरे के दरवाजे का रंग लाल अथवा गुलाबी रंग का रखना चाहिए। 

12. मंगलवार के दिन एक सूखे नारियल में छेद करके उसमें पाँच मेवे और थोड़ी पिसी हुई चीनी मिलाकर उसे पीपल के पेड़ के नीचे दबा दें । इससे विवाह में आने वाली समस्त अड़चने दूर होने लगती है । 

13.शीघ्र विवाह के लिए विवाह योग्य जातक को लगातार 7 गुरुवार तक बछड़े वाली गाय को अपने हाथो से चारा / भोजन कराना चाहिए । 

14.यदि किसी युवक के विवाह में विलम्ब हो रहा है, वह 21 मंगलवार को संध्या के समय किसी भी हनुमान मन्दिर में जाकर उनके माथे से थोडा सा सिंदूर लेकर उसी मन्दिर में राम-सीता की मृर्ति के चरणों में लगा दें और उनसे शीघ्र विवाह कराने हेतु निवेदन करें। इस उपाय को करने से शीघ्र ही गुणवान कन्या से विवाह के योग प्रबल बनते है । 

15. यदि किसी युवक के विवाह में परेशानियां आ रही हैं तो   उसका विवाह भी जल्दी हो जाता है

जानिये गृह शांति के आसान से उपाय


1. आजकल परिवार में पिता पुत्र के बीच में भी बहुत विरोध हो जाते है इससे परिवार में शांति भंग होने के साथ साथ और भी बहुत सी समस्याएँ उत्पन्न हो जाती है कई बार तो परिवार में विघटन की स्थिति भी आ जाती है इससे बचने के लिए कुछ बहुत ही अचूक उपाय बताए जा रहे है । 

2. यदि पिता की और से नाराजगी है तो पुत्र रविवार को सवा किलो गुड़ बहते हुए पानी में प्रवाहित करे …उसे ऐसा लगातार तीन रविवार को करना है । पिता की नाराज़गी जल्दी दूर हो जाएगी । 

3. पुत्र को नियमित रूप से गुड़,लाल फूल मिलाकर जल सूर्य देव को अर्पित करना चाहिए। पिता का स्नेह पुन: पुत्र पर बन जायेगा । 

4. रविवार को पुत्र यदि अपने पिता को कोई भी लाल रंग का उपहार दे तो अति शीघ्र पिता का पुत्र से विरोध ख़त्म हो जायेगा । 

5. यदि पुत्र की पिता से न बन रही हो तो अमावस्या,या ग्रहण के दिन पुत्र पिता के जूतों से पुराने मोज़े निकाल कर उनमें बिलकुल नए मोज़े रख दे, ऐसा करने से दोनों के बीच चल रहा गतिरोध अवश्य ही दूर हो जाएगा। 

6. यदि पुत्र रुष्ट है तो पिता प्रत्येक शनिवार को सुबह पीपल में मीठा जल एवं शाम को सरसों के तेल का दीपक जलायें या सरसों के तेल की धार अर्पित करें तो बहुत ही जल्दी पिता पुत्र के मध्य अवरोध ख़त्म हो जायेगा । 

7. शनिवार को पिता यदि अपने पुत्र को कोई भी नीले रंग का उपहार दे तो अति शीघ्र पुत्र का पिता से मतभेद समाप्त हो जाता है । 

8. बहन भाइयों के बीच में झगड़ा या मनमुटाव हो तो मंगलवार को सवा किलो गुड जमीन में दबाएँ ....सम्बन्ध अच्छे हो जायेंगे । 

9. यदि किसी महिला का ससुर उससे नाराज रहता हो तो वह महिला प्रतिदिन जल में गुड़ मिलाकर सूर्यदेव को अध्र्य दे तो उसकी यह समस्या दूर हो जाती है। 

10. किसी महिला का उसकी सास के साथ झगड़ा होता रहता हो तो वह स्त्री पूर्णिमा की रात में खीर बनाकर चंद्रमा की किरणों में रखे और फिर वह खीर अपनी सास को खिला दे। सास-बहू में बनने लगेगी।

11. यह कुछ ऐसे छोटे छोटे और सहज उपाय है जिनको अपनाकर हर व्यक्ति अपने परिवार में प्रेम और सौहार्दय के वातावरण का निर्माण कर सकता है ।

सफलता पाने के उपाय और टोटके


उपाय :- 1 सफलता पाने के लिए कन्याओं को चने की सब्जी खिलाएं |

उपाय :- 2 सबसे पहले करियर में सफलता के उपाय .. 6 कौड़ियां , लाल सिंदूर दो लौंग , एक टूकड़ा कपूर को एक साथ लाल कपड़े में बांध कर देवी को चढ़ाकर अपने साथ रखें , करियर में सफलता निश्चित मिलेगी | 

उपाय :- 3 रियल स्टेट , कारोबारी , transporters और industrialists के लिए सफलता के उपाय बेहद आसान हैं ...- रियल - स्टेट के लोग - पत्थर की मूर्ति दान करें- कारोबारी - साबूत मूंग की दाल दान करें- ट्रांसपोर्ट्स - नमकीन बादाम दान करें- उधोगपति - सोने की चेन दान करें

उपाय :- 4 कारोबार में सफलता नहीं मिल रही हो .. मुश्किलें आ रही हों तो ये उपाय जरुर करें .. एक नीला फूल , एक सफेद फूल , एक पीला फूल , एक लाल फूल और एक नारियल देवी मां को नवमी के दिन चढ़ाइए , दशहरे के दिन फूलों को नदी में बहा दीजिए , नारियल को लाल कपड़े में लपेट कर तिजोरी में रखें , कारोबार में सफलता मिलेगी |

उपाय :- 5 पांच टुकड़े फिटकरी 6 नीले फूल और एक कमल में बांधने की बेल्ट आज देवी को चढ़ा दें कल यानि दशमीं को बेल्ट किसी कन्या को दान दें .. नीले फूल बहते पानी में डालें और फिटकरी के टुकड़ों को संभाल कर अपने पास रखें , इन्टरव्यु में जाते वक्त या अपने कारोबार से जुड़े किसी महत्वपूर्ण काम पर जाते वक्त ये फिटकरी के टुकड़े अपने साथ लेजाना न भूलें .. सफलता मिलेगी .

उपाय :- 6 पांच गुडहल के फूल अलग अलग आंटे की 5 लोइयों में दबा कर इन आंटे की लोइयों को आज देवी को चढ़ा दें और कल यानि दशमी के दिन इन्हें सांड को खिला दें .. आप चाहे जिस कारोबार में हों आपको कामयाबी ज़रुर हासिल होगी |

उपाय :- 7 नये कारोबार में कामयाबी पाने का उपाय :
- पांच पान के पत्ते , पांच अलग - अलग मिठाई लें और साथ में पांच फूल , दस कपूर दस लौंग मिलाएं फूलों की पत्तियों और मिठाइयों को मिला लें नवमी के दिन पान के पांचो पत्तों पर मिठाई और फूल रखें फिर नींबू काट दीजिए और ध्यान रहे कि नींबू अलग न होने पाए
नींबू के हर पीस पर एक - एक लौंग और कपूर रखें - और इन्हें जला दें , अगले दिन सुबह ये सब नदी में डाल दें कारोबार में आपको सफलता ज़रुर मिलेगी |

उपाय :- 8 अलग - अलग चीजों का बिज़नेस करने वाले अलग - अलग चीजें दान में दें .. सौंदर्य - प्रसाधन के व्यवसायी - घी और रुई दान करेंलोहे के व्यवसायी - काजू और किशमिश दान करेंकपड़े के व्यवसायी - मीठा शर्बत पिलाएं |

जीवन में सफलता हासिल करने का वैसे तो कोई निश्चित फार्मूला नहीं है लेकिन मनुष्य सात आध्यात्मिक नियमों को अपनाकर कामयाबी के शिखर को छू सकता है।

“एजलेस बाडी, टाइमलेस माइंड” और “क्वांटम हीलिंग” जैसी 26 लोकप्रिय पुस्तकों के लेखक डा.चोपड़ा के अनुसार सफलता हासिल करने के लिए व्यक्ति में विशुद्ध सामर्थ्य, दान, कर्म, अल्प प्रयास, उद्देश्य और इच्छा, अनासक्ति और धर्म का होना आवश्यक है।


विशुद्ध सामर्थ्य का पहला नियम इस तथ्य पर आधारित है कि व्यक्ति मूल रूप से विशुद्ध चेतना है, जो सभी संभावनाओं और असंख्य रचनात्मकताओं का कार्यक्षेत्र है। इस क्षेत्र तक पहुंचने का एक ही रास्ता है. प्रतिदिन मौन. ध्यान और अनिर्णय का अभ्यास करना। व्यक्ति को प्रतिदिन कुछ समय के लिए मौन.बोलने की प्रकिया से दूर. रहना चाहिए और दिन में दो बार आधे घंटे सुबह और आधे घंटे शाम अकेले बैठकर ध्यान लगाना चाहिए।
इसी के साथ उसे प्रतिदिन प्रकृति के साथ सम्पर्क स्थापित करना चाहिए और हर जैविक वस्तु की बौद्धिक शक्ति का चुपचाप अवलोकन करना चाहिए। शांत बैठकर सूर्यास्त देखें. समुद्र या लहरों की आवाज सुनें तथा फूलों की सुगंध को महसूस करें ।

विशुद्ध सामर्थ्य को पाने की एक अन्य विधि अनिर्णय का अभ्यास करना है।

अमीर बनना चाहते हैं तो जानिए शुक्रवार के दिन क्या करें


शुक्र ग्रहों में सबसे चमकीला है और प्रेम का प्रतीक है। अपने जीवनसाथी को कष्ट देने, किसी भी प्रकार के गंदे वस्त्र पहनने, घर में गंदे एवं फटे-पुराने वस्त्र रखने से शुभ-अशुभ फल देता है। शुक्र ग्रह भोग-विलास, सांसारिक सुख, प्रेम, मनोरंजक, व्यवसाय, पत्नी का कारक ग्रह है। मूत्राशय, चर्म संबंधी बीमारी से इसका सीधा संबंध है।

* अपने भोजन को जूठा करने से पूर्व कुछ भाग गाय का निकालें।
* शुक्रवार को सफेद वस्त्र धारण करें।
* चांदी, चावल, दूध, दही, श्वेत चंदन, सफेद वस्त्र तथा सुगंधित पदार्थ किसी पुजारी की पत्नी को दान करें।
* घर में तुलसी का पौधा लगाएं और उसकी पूजा करें।
* श्वेत चंदन का तिलक करें।
* पानी में चंदन मिलाकर स्नान करें।
* चांदी का टुकड़ा या चंदन की लकड़ी नदी या नहर में प्रवाहित करें।
* सुगंधित पदार्थ का इस्तेमाल करें।
* संतान प्राप्ति के चाहवान दंपति हरसिंगार का पौधा घर में लगाएं तथा उसको ऐसे सींचे, जैसे अपने छोटे बच्चे की देखभाल करते हैं।
* शुक्रवार के दिन व्रत रखें।
* खीर कौओं और गरीबों को खिलाएं।
* शुक्रवार के दिन सफेद गाय को आटा खिलाना चाहिए।
* किसी खराब आंख वाले व्यक्ति को सफेद वस्त्र एवं सफेद मिष्ठान्न का दान करें।
* शुक्रवार के दिन गौ-दुग्ध से स्नान करना चाहिए।
* शुक्र बलवान होने पर‍ सिले हुए सुंदर वस्त्र, सेंट (परफ्यूम) और आभूषण उपहार में नहीं देने चाहिए। शुक्र से संबंधित वस्तुओं जैसे सुगंध, घी और सुगंधित तेल का प्रयोग नहीं करना चाहिए।

कुंडली में दिख रहा तलाक कैसे रोकें


कुंडली में अक्सर गलत जगह राहु होने के कारण पति पत्नी में तलाक की स्थिति पहुंच जाती है। अष्टम या सप्तम भाव में राहु, केतु या सूर्य ग्रह के आने से भी ग्रह कलेश का कारण बनता है। कुंडली में सप्तम भाव में शनि भी तलाक का कारण बन सकता है।

बचने के उपाय:

कुंडली में अगर शनि का दोष हो तो रुद्राक्ष धारण करें। शनि ग्रह को शांत करने की कोशिश करें। केतु के कारण यदि तलाक का योग बनता हो तो 9 मुखी रुद्राक्ष धारण करें। गणेशजी की पूजा करें। राहु कारण बन रहा है तो 8 मुखी रुद्राक्ष धारण करें। पुरुष सलाह लेकर हीरे को धारण करें। इससे घर में शांति और धन वृद्धि होती है।

आपसी कलह का निपटारा करने के लिए रात को सोते समय अपने सिर को पूर्व दिशा की ओर कर के सोएं। इससे सकारात्मक ऊर्जा का संचारित होगी और शांति मिलेगी। बात कचहरी तरह पहुंच गई हो तो घर के दक्षिण दिशा में तीन गोमती चक्र फेंक दें एवं एक सिंदूर की डिबिया में पाँच गोमती चक्र डालकर उसे पूजा स्थल पर रख दें और प्रतिदिन पूजा के समय महिलाएं उससे मांग भरे और पुरुष तिलक करें। तलाक रोकने के लिए यह एक बेहद कारगर उपाय है।

जन्मकुंडली में संयुक्त ग्रहों के प्रभाव और उपाय


यदि किसी जातक की जन्मकुंडली में शुक्र और सूर्य की युति किसी भी भाव में हो तो जातक को दुर्गा पूजन लाभदायक होगा ।

सूर्य.शनि की युति कुण्डली के किसी भी भाव में होने पर जातक बादाम,नारियल बहते पानी में बहाए।

सूर्य.राहू की युति होने पर जातक जौ को दूध या गौ मूत्र से धोकर बहते पानी में बहायें।

यदि जातक की कुण्डली में बुध अशुभ या नीच राशि का हो तब जातक मंगल एवं राहू के उपाय करके बुध के दुश्प्रभाव को दूर करें।

- सूर्य.केतु की युति होने पर सूर्य ग्रहण के समय तिल,नींबू,पका केला बहते पानी जैसे नदी में बहायें।

- गौ मूत्र घर में छिड़कने से केतु.शुक्र एवं बुध का अशुभ प्रभाव कम हो जाता है ।
- जातक की जन्म कुण्डली में चंद्र.शुक्र की युति हो तो चांदी की ठोस गोली हमेसा अपने जेब में रखें ।

- चंद्र.शनि की युति होने पर भानि एवं केतु के उपाय लाभकारी होते है। चंद्रग्रहण के समय भानि की वस्तुएं बहते पानी में बहाने से लाभ होता है।

- भानि.चंद्र के अशुभ प्रभाव को दूर करने के लिए सूर्य का उपाय करें ।

- कुण्डली में मंगल.राहू की युति होने पर मिट्टी के बर्तन में जौ भरकर बहते पानी जैसे नदी में बहाये तथा मंगल का उपाय करें ।

- बुध.शनि की युति में जातक को भाराब मांस का सेवन नहीं करना चाहिए।

- बुध.राहू की युति हो तो जातक को कच्ची मिट्टी की सौ गोलियां बनाकर एक गोली प्रतिदिन धर्म स्थल में पहुंचानी चाहिएं।

- गुरू.बुध की युति में खांड से भरा मिट्टी का बर्तन भूमि में दबाना चाहिए।

- चंद्र.राहु की युति हो, तब चंद्रग्रहण पर जौं, कोयला, सरसों आदि राहु की वस्तुएं बहते पानी में बहायें और मंगल,गुरू का उपाय करें।

- चंद्र.केतु की युति होने पर जातक बुध एवं केतु की वस्तुओं का दान करें । तीन केले प्रतिदिन ४८ दिन तक मंदिर में दान करें।

- मंगल.बुध की अशुभ युति में जातक मंगल का उपाय करें ।

- मंगल. शनि की युति होने पर मंगल या भानि का उपाय करें साथ ही चंद्र का उपाय करें।

- शुक्र.राहु की युति होने पर दूध एवं हरे नारियल का दान करें ।

- यदि कुण्डली में सूर्य.चंद्र.राहु की युति हो तो जातक दुर्गा उपासना करें एवं बुध का उपाय करें ।

-इसी तरह सूर्य.चंद्र.केतु की युति होने पर भी दुर्गा उपासना करें एवं बुध का उपाय करें ।

- कुण्डली में सूर्य.बुध.शुक्र की युति होने पर जातक कान में स्वर्ण धारण करें तथा काला,सफेद कुत्ता पाले । शुध्द चांदी का छल्ला भी धारण कर सकते है।

- गुरू. शनि की युति में, शराब,मांस,मदिरा का उपयोग न करे। शिव उपासना करें। चंद्र का उपाय करें ।

- गुरू.राहु की युति में अशुभता से बचने के लिए सोना धारण करें। चितकबरें कुत्ते की सेवा करें। जौं को दूध से धोकर लगातार ४३ दिन तक बहते पानी में बहायें।

-शुक्र. शनि की युति हो तो तांबे का पैसा बहते पानी में बहायें और दाम भाव में जो भी ग्रह बैठा हो उसका उपाय करें।

- सूर्य.बुध.राहु की युति हो तो जातक चंद्रमा का उपाय करें।

- यदि सूर्य.बुध की युति हो तो गायत्री पाठ करें । हरे तोते पाले ।

- चंद्र.मंगल और भानि की युति में मंगल का उपाय करें।

- चंद्र.मंगल.राहु की युति हो तो दूध में मीठा हलुआ बनाकर स्वयं खाये तथा दुसरों को खिलाएं।

- गुरू.शनि.राहु की युति हो तो भानि की वस्तुएं भूमि में दबायें।

- यदि शनि.राहु.शुक्र की युति हो तो जातक रोटी के तीन टुकड़े करके एक गाय को एक कुत्ता और एक कौएं को खिलाएं।

- गुरू.शनि.बुध की युति हो तो बुध की वस्तुएं जैसे हरा मूंग कुएं में गिराये तथा बुध को उच्च करें।

- गुरू.मंगल.बुध की युति हो तो जातक सोना धारण करे।

- शुक्र.शनि.बुध की युति हो,तो काली गाय या काला कुत्ते को रोटी दें।

सूर्य ग्रह के उपाय व सूर्य ग्रह की शांति


वैदिक ज्योतिष में सूर्य को नवग्रहों का राजा कहा जाता है। सूर्य के प्रभाव से मनुष्य को सम्मान और सफलता मिलती है। सूर्य से शुभ फल की प्राप्ति और अशुभ प्रभाव से बचाव के लिए कई उपाय बताये गए हैं। सूर्य मंत्र, सूर्य यंत्र और सूर्य नमस्कार समेत कई उपायों को करने से लाभ मिलता है। हर दिन नियमित रूप से सूर्य मंत्र उच्चारित करने और सूर्य नमस्कार करने से सकारात्मक ऊर्जा प्राप्त होती है। सूर्य ग्रह सरकारी एवं विभिन्न क्षेत्रों में उच्च सेवा का कारक माना गया है। 

वैदिक ज्योतिष के अनुसार जन्म कुंडली में सूर्य की शुभ स्थिति व्यक्ति को जीवन में उन्नति प्रदान करती है लेकिन यदि सूर्य अशुभ प्रभाव देता है, तो सम्मान की हानि, पिता को कष्ट, उच्च पद प्राप्ति में बाधा, ह्रदय और नेत्र संबंधी रोग होते हैं। जन्म कुंडली में सूर्य से संबंधित किसी भी परेशानी के समाधान के लिए करें सूर्य ग्रह से जुड़े विभिन्न उपाय।

वेश-भूषा एवं जीवन शैली से जुड़े सूर्य के उपाय: 

लाल और केसरिया रंग के वस्त्र धारण करें।

पिता जी, सरकार एवं उच्च अधिकारियों का सम्मान करें।

प्रातः सूर्योदय से पहले उठें और अपनी नग्न आँखों से उगते हुए सूरज का दर्शन करें।

विशेषतः सुबह किये जाने वाले सूर्य के उपाय:

भगवान विष्णु की पूजा करें। 

सूर्य देव की पूजा करें।

भगवान राम की पूजा करें।

आदित्य हृदय स्तोत्र का पाठ

सूर्य के लिये व्रत

सूर्य ग्रह का आशीर्वाद पाने हेतु रविवार को व्रत धारण किया जाता है।

सूर्य के लिये दान करें

सूर्य ग्रह से संबंधित वस्तुओं का दान रविवार को सूर्य की होरा और सूर्य के नक्षत्रों (कृतिका, उत्तरा-फाल्गुनी, उत्तरा षाढ़ा) में प्रातः 10 बजे से पूर्व किया जाना चाहिए।

दान करने वाली वस्तुएँ: गुड़, गेहूँ, तांबा, रूबि माणिक्य, लाल पुष्प, खस, मैनसिल आदि।

सूर्य का यंत्र:

सूर्य ग्रह से शुभ फल पाने के लिए रविवार के दिन सूर्य यंत्रको सूर्य की होरा एवं इसके नक्षत्र में धारण करना चाहिए।

सूर्य के लिये जड़ी:

सूर्य का आशीर्वाद पाने के लिए बेल मूल धारण करें। इस जड़ को रविवार के दिन सूर्य की होरा अथवा सूर्य के नक्षत्र में धारण करना चाहिए।

सूर्य के लिये रुद्राक्ष:

1 मुखी / 3 मुखी / 12 मुखी

एक मुखी रुद्राक्ष धारण करने के लिए मंत्र: 

ॐ ह्रीं नमः।
ॐ यें हं श्रों ये।।

तीन मुखी रुद्राक्ष धारण करने हेतु मंत्र: 
ॐ क्लीं नमः।
ॐ रें हूं ह्रीं हूं।।

बारह मुखी रुद्राक्ष धारण करने हेतु मंत्र: 

ॐ क्रों श्रों रों नमः। 
ॐ ह्रीं श्रीं घृणि श्रीं।।

सूर्य का मंत्र:

सूर्य ग्रह को प्रसन्न करने के लिए आप सूर्य बीज मंत्र का जाप कर सकते हैं। 
मंत्र- ॐ ह्रां ह्रीं ह्रौं सः सूर्याय नम।

वैसे तो सूर्य बीज मंत्र को 7000 बार जपना चाहिए परंतु देश-काल-पात्र सिद्धांत के अनुसार कलयुग में इस मंत्र का (7000x4) 28000 बार उच्चारण करना चाहिए।

आप इस मंत्र का भी जाप कर सकते हैं:

 ॐ घृणि सूर्याय नमः!

कुंडली में पितृ दोष कब,कैसे,क्यों और दूर करने के उपाय


• जन्म कुंडली के त्रिकोण भावों में से किसी एक भाव पर पितृ कारक ग्रह सूर्य की राहु अथवा शनि के साथ युति हो तो जातक को पितृ दोष होता है।

• राहु और शनि कुंडली के किसी भाव में विराजमान हो तो पितृ दोष होता है।

• लग्न तथा चन्द्र कुंडली में नवां भाव या नवमेश अगर राहु या केतु से ग्रसित हो तो।

• जन्म कुंडली में लग्नेश यदि त्रिक भाव (6,8 या 12) में स्थित हो तथा राहु लग्न भाव में हो तब भी पितृदोष होता है।

• अष्टमेश का लग्नेश, पंचमेश अथवा नवमेश के साथ स्थान परिवर्तन योग भी पितृ दोष का निर्माण करता है।

• दशम भाव को भी पिता का घर माना गया है अतः दशमेश छठे, आठवें या बारहवें भाव में हो इसका राहु से दृष्टि या योग आदि का संबंध हो तो भी पितृदोष होता है।

• यदि आठवें या बारहवें भाव में गुरु-राहु का योग और पंचम भाव में सूर्य-शनि या मंगल आदि कू्र ग्रहों की स्थिति हो तो पितृ दोष के कारण संतान कष्ट या संतान सुख में कमी रहती है।

• अगर कुंडली में पितृ कारक ग्रह सूर्य अथवा रक्त कारक ग्रह मंगल इन दोनों में से कोई भी नवम भाव में नीच का होकर बैठा हो और उस पर राहु/केतु की दृष्टि हो तो पितृ दोष का निर्माण हो जाता है।

• यदि कुंडली में अष्टमेश राहु के नक्षत्र में तथा राहु अष्टमेश के नक्षत्र में हो तथा लग्नेश निर्बल एवं पीड़ित हो।
इसके अलावा और भी कई योग ऐसे हैं जिससे पितृ दोष का निर्माण होता है।

पितृ दोष का कारण :

पितृदोष, अर्थात हमारे अथवा हमारे पितरों या पूर्वजों द्वारा किए गए कुछ ऐसे कर्म जो हमारे लिए श्राप बन जाते हैं। पितृ दोष के अनेक कारण होते हैं। परिवार में किसी की अकाल मृत्यु होने से, अपने माता-पिता आदि सम्माननीय जनों का अपमान करने से, मरने के बाद माता-पिता का उचित ढंग से क्रियाकर्म और श्राद्ध न करने से पितरों का दोष लगता है। गौ हत्या और भ्रूण हत्या से भी पितृदोष लगता है।

नारायणबली नागबली और त्रिपिंडी पूजा :

त्रियम्ब्केश्वर नासिक में जाकर करवाये। यह पूजा अपने आप में सम्पूर्ण पित्रदोषो और कालसर्प दोषो मुक्ति प्रदान करने के लिए करवाई जाती है। इसके लिए आपको ३ दिन का समय निकाल कर नासिक जाना पड़ेगा। यह पूजा इन दोषो की मुक्ति के लिए अचूक उपाय है।

पितृ दोष दूर करने के लिए सोमवती अमावस्या का अद्भुत प्रयोग :

सोमवती अमावस्या पितृदोष दूर करने के लिये अतिउत्तम है। सोमवती अमावस्या के दिन पीपल के पेड के पास जाइये, उस ही पीपल देवता को एक जनेऊ दीजिये साथ ही दुसरा जनेऊ भगवान विष्णु जी के नाम से उसी पीपल के पेड को दीजिये, पीपल के पेड और भगवान विष्णु को नमस्कार कर प्रार्थना कीजिये, अब एक सौ आठ परिक्रमा उस पीपल के पेड की कारे दुध की बनी मिठाई को हर परिक्रमा के साथ पीपल को अर्पित करते जाईए। परिक्रमा करते समय “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” मंत्र को जपते रहे। 108 परिक्रमा पूरी करने के बाद पीपल के पेड और भगवान विष्णु से फिर प्रार्थना करे कि जाने अन्जाने में हुये अपराधो के लिए उनसे क्षमा मांगिये। और अपने पितरो के कल्याण के लिए प्रार्थना करंे

पितृ दोष का निवारण के अन्य सरल उपाय :

पितृदोष के निवारण के लिए श्राद्ध काल में पितृ सुक्त का पाठ संध्या समय में तेल का दीपक जलाकर करे। पितृश्राप/पितृदोष से मुक्ति के लिए अपने पितरों का पिंडदान, तर्पण और श्राद्ध करना चाहिए।नियमित श्राद्ध विधि के अतिरिक्त श्राद्ध के दिनों में कौओं, कुत्तों व जमादारों को खाना देना चाहिए। भागवत कथा का आयोजन करें और श्रवण करें।

अगर सूर्य त्रिक भाव का भी स्वामी है अथवा अकारक ग्रह है तो लाल कपडा, लाल मसूर, गेंहू, तांबा, लाल फल का रविवार को दान करें। पिता का अपमान न करें। बड़े बुजुर्गों को सम्मान दें। अमावस्या, पुण्य तिथि, अथवा श्राद तिथि को रुद्राभिषेक करें/कराएं। प्रत्येक अमावस्या को एक ब्राह्मण को भोजन कराने व दक्षिणा-वस्त्र भेंट करने से पितृदोष कम होता है।

विष्णु सहस्त्रनाम का नियमित पाठ भी पितृ दोष शान्ति का अद्भुत उपाय है। यह पाठ कम से कम ४३ दिन करना चाहिए। हालाँकि यह पाठ लम्बा होता है अगर आप यह न कर पाये तो नीचे लिखे गए उपायों को भी करके लाभ उठा सकते है।

हर अमावस को अपने पितरों का ध्यान करते हुए पीपल पर कच्चे दूध में गंगाजल, थोड़े काले तिल,चीनी, चावल, जल, पुष्पादि चढ़ाते हुए ॐ नमो भगवते वासुदेवाय का पाठ करे।

अगर पितृ दोष सूर्य की राहु अथवा शनि के युति के कारण बन रहा है तो शुक्लपक्ष के प्रथम रविवार दिन, घर में विधि-विधान से ‘सूर्ययंत्र’ स्थापित करें। सूर्य को नित्य तांबे के पात्र में जल लेकर अघ्र्य दें। जल में कोई भी लाल पुष्प, चावल व रोली अवश्य मिश्रित कर लें। जब घर से बाहर जाएं तो यंत्र दर्शन जरूर करें। कौओं और मछलियों को चावल और घी मिलाकर बनाये गये लड्डू हर शनिवार को दीजिये।

पितृ दोष और वास्तु :

• पितृदोष निवारण के लिए अपने घर की दक्षिण दिशा की दीवार पर अपने दिवंगत पूर्वजों के फोटो लगाकर उन पर हार चढ़ाकर सम्मानित करना चाहिए तथा प्रतिदिन उनके सम्मुख घी का दीपक जलाना चाहिए।

• जिस घर में पीने के पानी का स्थान दक्षिण दिशा में हो उस घर को पितृदोष अधिक प्रभावित नहीं करता साथ ही यदि नियमित रूप से उस स्थान पर घी का दीपक लगाया जाए तो पितृदोष आशीर्वाद में बदल जाता है।

• पारद के शिवलिंग में बहुत गुण होते है इसलिये इसकी स्थापना कर प्रतिदिन उनकी पूजा करें तथा अभिषेक करें ।

कुंडली के बारह भावों में चंद्रमा का फल और उपाय


चन्द्रमा माँ का सूचक है और मन का कारक है. शास्त्र कहता है की 'चंद्रमा मनसो जात:'. इसकी राशि कर्क है. कुंडली में चंद्र अशुभ होने पर माता को किसी भी प्रकार का कष्ट या स्वास्थ्य को खतरा होता है, दूध देने वाले पशु की मृत्यु हो जाती है. स्मरण शक्ति कमजोर हो जाती है. घर में पानी की कमी आ जाती है या नलकूप, कुएं आदि सूख जाते हैं. इसके प्रभाव से मानसिक तनाव, मन में घबराहट, मन में तरह तरह की शंका और सर्दी बनी रहती है. व्यक्ति के मन में आत्महत्या करने के विचार भी बार-बार आते रहते हैं.   

जिस प्रकार सूर्य का प्रभाव आत्मा पर पूरा पड़ता है, ठीक उसी प्रकार चन्द्रमा का भी मनुष्य पर प्रभाव पड़ता है. खगोलवेत्ता ज्योतिष काल से यह मानते आ रहे हैं कि ग्रह तथा उपग्रह मानव जीवन पर पल-पल पर प्रभाव डालते हैं. जगत की भौतिक परिस्थिति पर भी चंद्रमा का प्रभाव होता है. चंद्रमा का घटता बढ़ता आकार जिस प्रकार पृथ्‍वी पर समुद्र में ज्वार भाटा का कारक बनता है उसी प्रकार इसका प्रभाव मनुष्‍य के तन और मन पर भी पड़ता है. चन्द्रमा जैसे-जैसे कृष्ण पक्ष में छोटा व शुक्ल पक्ष में पूर्ण होता है वैसे-वैसे मनुष्य के मन पर भी चन्द्र का प्रभाव पड़ता है. 

कुंडली के बारह भावों में चंद्रमा का फल:

 1. पहले लग्न में चंद्रमा हो तो जातक बलवान, ऐश्वर्यशाली, सुखी, व्यवसायी, गायन वाद्य प्रिय एवं स्थूल शरीर का होता है.   

2. दूसरे भाव में चंद्रमा हो तो जातक मधुरभाषी, सुंदर, भोगी, परदेशवासी, सहनशील एवं शांति प्रिय होता है.  

3. तीसरे भाव में अगर चंद्रमा हो तो जातक पराक्रम से धन प्राप्ति, धार्मिक, यशस्वी, प्रसन्न, आस्तिक एवं मधुरभाषी होता है. 

4. चौथे भाव में हो तो जातक दानी, मानी, सुखी, उदार, रोगरहित, विवाह के पश्चात कन्या संततिवान, सदाचारी, सट्टे से धन कमाने वाला एवं क्षमाशील होता है.   

5. लग्न के पांचवें भाव में चंद्र हो तो जातक शुद्ध बुद्धि, चंचल, सदाचारी, क्षमावान तथा शौकीन होता है. 

6. लग्न के छठे भाव में चंद्रमा होने से जातक कफ रोगी, नेत्र रोगी, अल्पायु, आसक्त, व्ययी होता है.  

7. चंद्रमा सातवें स्थान में होने से जातक सभ्य, धैर्यवान, नेता, विचारक, प्रवासी, जलयात्रा करने वाला, अभिमानी, व्यापारी, वकील एवं स्फूर्तिवान होता है.  

8. आठवें भाव में चंद्रमा होने से जातक विकारग्रस्त, कामी, व्यापार से लाभ वाला, वाचाल, स्वाभिमानी, बंधन से दुखी होने वाला एवं ईर्ष्यालु होता है.  

9. नौंवे भाव में चंद्रमा होने से जातक संतति, संपत्तिवान, धर्मात्मा, कार्यशील, प्रवास प्रिय, न्यायी, विद्वान एवं साहसी होता है.  

10. दसवें भाव में चंद्रमा होने से जातक कार्यकुशल, दयालु, निर्मल बुद्धि, व्यापारी, यशस्वी, संतोषी एवं लोकहितैषी होता है. 

11. लग्न के ग्यारहवें भाव में चंद्रमा होने से जातक चंचल बुद्धि, गुणी, संतति एवं संपत्ति से युक्त, यशस्वी, दीर्घायु, परदेशप्रिय एवं राज्यकार्य में दक्ष होता है.  

12. लग्न के बारहवें भाव में चंद्रमा होने से जातक नेत्र रोगी, कफ रोगी, क्रोधी, एकांत प्रिय, चिंतनशील, मृदुभाषी एवं अधिक व्यय करने वाला होता है.   

चंद्रमा का विभिन्न भावों में फल, दोष और निवारण  चन्द्र का पहले भाव में फल सामान्य तौर पर कुण्डली का पहला घर मंगल और सूर्य के प्रभाव के अंतर्गत आता है. जब चंद्रमा यहां स्थित हो तो यह भाव मंगल, सूर्य और चंद्रमा के संयुक्त प्रभाव में होगा. ये तीनों आपस में मित्र हैं और तीनो यहां की स्थिति के अनुसार परिणाम देंगे. सूर्य और मंगल इस घर में स्थित चंद्रमा को पूर्ण सहयोग देंगे. ऐसा जातक रहमदिल होगा और उसके भीतर उसकी मां के सभी लक्षण और गुण मौजूद होंगे. वह या तो भाइयों में बडा होगा या फिर उसके साथ ऐसा बर्ताव किया जाता होगा. जातक पर उसकी मां का आशिर्वाद हमेशा रहता है साथ ही वह अपनी मां को प्रसन्न रखता है ऐसा करने से वह उन्नति करता है और उसे हर प्रकार से समृद्धि मिलती है. 

बुध से सम्बंधित चीजें और रिश्तेदार जैसे साली और हरा रंग आदि जो चंद्रमा के लिए हानिकार है, जातक के लिए भी प्रतिकूल प्रभाव साबित होगें इसलिए बेहतर है उन लोगों से दूर रहें. दूध से खोया बनाना या लाभ के लिए दूध बेचना आदि कृत्य पहले भाव में स्थित चंद्रमा को कमजोर करते हैं इसका मतलब यदि जातक स्वयं भी इस प्रकार के कामों सें संलग्न होता है तो जातक का जीवन और सम्पत्ति नष्ट होने लगती है. ऐसे में जातक को दूध और पानी मुफ्त में बांटना चाहिए इससे आयु बढती और चारो ओर से समृद्धि आती है. ऐसा करने से जातक को 90 साल की दीर्घायु मिलती है और उसे सरकार से सम्मान और प्रसिद्धि मिलती है.  

उपाय: 

1. 24 से 27 वर्ष की आयु के मध्य शादी नहीं करनी चाहिए, या तो 24 साल के पहले अथवा 27 साल के बाद ही शादी करनी चाहिए. 

2. 24 से 27 वर्ष की आयु के मध्य अपनी कमाई से घर का निर्माण नहीं करना चाहिए. 

3. हरे रंग और पत्नी की बहन अर्थात शाली से दूर रहना चाहिए. 

4. घर में टोटी के साथ एक चांदी के बर्तन या केतली न रखें. 

5. यथा सम्भव बरगद की जड़ में पानी डालें. 

6. चारपाई के चारों पायों में तांबें की कीलें ठोके. 

7. अपने बच्चों के कल्याण के लिए जब भी एक नदी पार करें, हमेशा उसमें एक सिक्का डालें. 

8. हमेशा अपने घर में चांदी की एक थाली रखें. 

9. पानी या दूध पीने के लिए हमेशा चांदी के बर्तन का प्रयोग करें, कांच के बने बर्तन के उपयोग से बचें. 

चन्द्र का दूसरे भाव में फल दूसरे भाव चंद्रमा स्थित होने पर वह भाव बृहस्पति, शुक्र और चंद्रमा के प्रभाव में होगा. क्योंकि दूसरा घर बृहस्पति का पक्का घर होता है और दूसरी राशि बृषभ का स्वामी शुक्र होता है. यहां स्थित चंद्रमा बहुत अच्छे परिणाम देता है. चंद्रमा इस घर में बहुत मजबूत हो जाता है क्योंकि उसे शुक्र के खिलाफ बृहस्पति का अनुकूल समर्थन मिल जाता है इस कारण यहां का चंद्रमा अच्छे परिणाम देता है. ऐसे में जातक के बहनें नहीं होतीं लेकिन निश्चित रूप से भाइयों की प्राप्ति होती है. लेकिन यदि ऐसा नहीं होता तो जातक की पत्नी के भाई अवश्य होते हैं. जातक को पैतृक सम्पत्ति में हिस्सा जरूर मिलता है. ग्रहों की स्थिति जो भी हो लेकिन यहां स्थित चंद्रमा जातक के वंश को जरूर बढाता है. जातक अच्छी शिक्षा प्राप्त करता है जिससे उसके भाग्योदय में सहयोग मिलता है. चंद्रमा की चीजों से जुड़े व्यवसाय लाभप्रद साबित होंगे. जातक एक प्रतिष्ठित शिक्षक भी हो सकता है. बारहवें भाव में स्थित केतू यहां के चंद्रमा को ग्रहण लगाने वाला रहेगा जो जातक को अच्छी शिक्षा या पुत्र से वंचित कर सकता है.  

उपाय: 

1. घर के भीतर मंदिर का होना जातक की पुत्र प्राप्ति में बाधक हो सकता है. 

2. चंद्रमा से सम्बंधित चीजें जैसे चांदी, चावल, घर की कच्ची फर्श, मां और बुजुर्ग महिलाएं तथा उनका आशीर्वाद जातक के लिए बहुत भाग्यशाली रहेंगे.  

3. लगातार 43 दिनों तक कन्याओं (छोटी लड़कियों) को हरा कपडा बांटें. 

4. चंद्रमा से सम्बंधित चीजें जैसे चांदी का एक चौकोर टुकड़ा अपने घर की नीव में दबाएं. 

चन्द्र का तीसरे भाव में फल तीसरे भाव में स्थित चंद्रमा पर मंगल और बुध का भी प्रभाव होता है। यहां स्थित चंद्रमा लंबा जीवन और अत्यधिक धन देने वाला होता है। तीसरे भाव में स्थित चंद्रमा के कारण यदि नवमें और ग्यारहवें घर में कोई ग्रह न हों तो मंगल और शुक्र अच्छे परिणाम देंगें. जातक शिक्षा और सीखने की प्रगति के साथ, जातक के पिता की अर्थिक स्थिति खराब होगी लेकिन इससे जातक की शिक्षा और सीखने की प्रगति पर कोई प्रतिकूल प्रभाव नहीं पडेगा. यदि केतु कुण्डली में किसी शुभ जगह पर है और चंद्रमा पर कोई दुश्प्रभाव नहीं डाल रहा है तो जातक की शिक्षा अच्छे परिणाम देने वाली और हर तरीके में फायदेमंद साबित होगी. यदि चंद्रमा हानिकर है, तो यह बडी धनहानि और खर्चे का कारण हो सकता है यह घटना नवमें भाव में बैठे ग्रह की दशा या उम्र में हो सकती है.  

उपाय: 

1. पुत्री के जन्म के बाद चन्द्रमा से सम्बंधित चीजें जैसे चांदी और चावल आदि का दान करें तथा पुत्र के जन्म के बाद सूर्य से सम्बंधित चीजें जैसे गेहूं और गुड़ आदि का दान करें.  

2. अपनी बेटी के पैसे और धन का उपयोग न करें. 

3. आठवें घर में स्थित बुरे ग्रह के दुष्प्रभाव से बचने के लिए, मेहमानों और दूसरों को खुलकर दूध और पानी बांटें. 

4. दुर्गा देवी की पूजा करें तथा कन्याओं को भोजन और मिठाई देकर उनके पांव छुएं और आशिर्वाद लें.  

चन्द्र का चौथे भाव में फल  चौथे भाव में स्थित चंद्रमा पर केवल चंद्रमा का ही पूर्णरूपेण प्रभाव होता है क्योंकि वह चौथे भाव और चौथी राशि दोनो का स्वामी होता है. यहां चन्द्रमा हर प्रकार से बहुत मजबूत और शक्तिशाली हो जाता है. चंद्रमा से संबन्धित वस्तुएं जातक के लिए बहुत फायदेमंद साबित होती हैं. मेहमानों को पानी की के स्थान पर दूध भेंट करें. मां या मां के जैसी स्त्रियों का पांव छूकर आशिर्वाद लें. चौथा भाव आमदनी की नदी है जो व्यय बढानें के लिए जारी रहेगी. दूसरे शब्दों में खर्चे आमदनी को बढाएंगे. जातक प्रतिष्ठित और सम्मानित व्यक्ति होने के साथ-साथ नरम दिल और सभी प्रकार से धनी होगा. जातक को अपनी माँ के सभी लक्षण और गुण विरासत में मिलेंगे और वह जीवन की समस्याओं का सामना किसी शेर की तरह साहसपूर्वक करेगा. जातक सरकार से सहयोग और सम्मान प्राप्त करेगा साथ में वह दूसरों को शांति और आश्रय प्रदान करेगा. जातक निश्चित तौर पर अच्छी शिक्षा प्राप्त करेगा. 

यदि बृहस्पति 6 भाव में हो और चंद्रमा चौथे भाव में तो जातक को पैतृक व्यवसाय फायदा देगा. यदि जातक के पास कोई अपना कीमती सामान गिरवी रख जाएगा तो वह उसे मांगने के लिए कभी नहीं आएगा. यदि चंद्रमा चौथे भाव में चार ग्रहों के साथ हो तो जातक आर्थिक रूप से बहुत मजबूत और अमीर होगा. पुरुष ग्रह जातक की मदद पुत्र की तरह करेंगे और स्त्री ग्रह पुत्रियों की तरह. 

उपाय: 

1. लाभ कमाने के लिए दूध का खोया बनाना अथवा दूध बेचना आदि कार्य से आमदनी, जीवन के विस्तार और मानसिक शांति पर बहुत प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा अतः इससे बचें. 

2. व्यभिचार और अनैतिक सम्बंध जातक की प्रतिष्ठा और आर्थिक मामलों के लिए हानिकारक होगें इसलिए इनसे बचाव जरूरी है. 

3. अधिक खर्च, अधिक आय. 

4. किसी भी शुभ या नया काम शुरू करने से पहले, घर में दूध से भरा कोई घड़ा या कनस्तर रखें. 

5. दशम भाव में स्थित बृहस्पति के दुष्प्रभाव से छुटकारा पाने के लिए, जातक को अपने दादाजी के साथ पूजा स्थान में जाकर भगवान के चरणों में माथा रखकर चढ़ावा चढ़ाएं. 

चन्द्र का पांचवें भाव में फल  पांचवें भाव में स्थित चंद्रमा के परिणाम में सूर्य, केतू और चंद्रमा का प्रभाव रहेगा. जातक हमेशा सही तरीके से पैसा कमाने की कोशिश करेगा, वह कभी भी गलत तरीके नहीं अपनाएगा. वह व्यापार में तो अच्छा नहीं कर पाएगा लेकिन निश्चित रूप से सरकार की ओर से सम्मान और सहयोग प्राप्त करेगा. उसके द्वारा समर्थित कोई भी जीत जाएगा. यदि केतू सही स्थान पर बैठा है और फायदेमंद है तो जातक के पांच पुत्र होंगें चाहे चंद्रमा किसी अशुभ ग्रह के प्रभाव में ही क्यों न हो. 

अपनी शिक्षा और सीख के कारण जातक दूसरों के कल्याण के लिए अनेक उपाय करेगा लेकिन दूसरे उसके लिए अच्छा नहीं करेंगे. अगर जातक लालची और स्वार्थी हो जाता है तो वह नष्ट हो जाएगा. यदि जातक अपनी योजनाओं को एक गुप्त रखने में विफल रहता है, उसके अपने ही लोग उसे नुकसान पहुंचाएंगे. 

उपाय: 

1. अपनी वाणी पर नियंत्रण रखें. किसी के लिए अभद्र भाषा का प्रयोग न करें ऐसा करना मुशीबतों को निमंत्रण देना होगा. 

2. लालची और स्वार्थी बनने से बचें. 

3. दूसरों के साथ छल और बेईमानी न करें, इसका आप पर ही प्रतिकूल असर होगा. 

4. किसी के खिलाफ कुछ करनें से पहले किसी और से सलाह जरूर लें इसका आपके जीवन पर सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा और आप 100 सालों तक जिएंगे.  

5. लोगों की सेवा करें इससे आपकी आमदनी और प्रतिष्ठा में वृद्धि होगी. 

चन्द्र का छठें भाव में फल यह भाव बुध और केतु से प्रभावित होता है। इस घर में स्थित चंद्रमा दूसरे, आठवे, बारहवें और चौथे घरों में बैठे ग्रहों से प्रभावित होता है. ऐसा जातक बाधाओं के साथ शिक्षा प्राप्त करता है और अपनी शैक्षिक उपलब्धियों का लाभ उठाने के लिए उसे बहुत संघर्ष करना पडता है. यदि चंद्रमा छठवें, दूसरे, चौथे, आठवें और बारहवें घर में होता है तो यह शुभ भी होता है ऐसा जातक किसी मरते हुए के मुंह में पानी की कुछ बूंदें डालकर उसे जीवित करने का काम करता है. यदि छठवें भाव में स्थित चंद्रमा अशुभ है और बुध दूसरे या बारहवें भाव में स्थित है तो जातक में आत्महत्या करने की प्रवृत्ति पाई जाएगी. ठीक इसी तरह यदि चन्द्रमा अशुभ है और सूर्य बारहवें घर में है तो जातक या उसकी पत्नी या दोनो ही आंख के रोग या परेशानियों से ग्रस्त होंगे.  

उपाय: 

1. अपने पिता को अपने हाथों से दूध परोसें. 

2. रात के समय दूध कभी भी न पिएं. लेकिन दिन के समय दूध उपयोग किया जा सकता है. रात के समय दही और पनीर का सेवन किया जा सकता है. 

3. दूध का दान न करें। केवल पूजा के धार्मिक स्थानों पर दूध दिया जा सकता है. 

4. जातक अस्पताल या श्मशान भूमि में कुआं खुदवाएं. 

चन्द्र का सातवें भाव में फल  सातवां घर शुक्र और बुध से संबंधित होता है. जब चंद्रमा इस भाव में स्थित होता है तो परिणाम शुक्र, बुध और चंद्रमा से प्रभावित होता है. शुक्र और बुध मिलकर सूर्य का प्रभाव देते हैं. पहला भाव सातवें को देखता है नतीजन पहले घर से सूर्य की किरणे सातवें भाव में बैठे चंद्रमा को सकारात्म रूप से प्रभावित करती हैं जिसका मतलब है कि चंद्रमा से संबंधित चीजों और रिश्तेदारों लाभकारी और अच्छे परिणाम मिलेंगे. शैक्षिक उपलब्धियां पैसा या धन कमाने के लिए उपयोगी साबित होंगी. उसके पास जमीन जायदाद हो या न हो लेकिन उसके पास नकद निश्चित रूप से हमेशा रहेगा. उसके पास कवि या ज्योतिषी बनने की अच्छी योग्यता होगी. अथवा वह चरित्रहीन हो सकता है और रहस्यवाद और अध्यात्मवाद को बहुत चाहता होगा. सातवें भाव में स्थित चंद्रमा जातक की पत्नी और मां के बीच अर्थ संघर्ष देता है जो दूध के व्यवसाय में प्रतिकूल प्रभावी होता है. ऐसे में जातक अगर मां का कहना नहीं मानता तो उसे तनाव और परेशानियों का सामना करना पडता है. 

उपाय: 

1.  24वें वर्ष में शादी न करें. 

2. अपनी मां को हमेशा खुश रखें. 

3. लाभ कमाने के लिए कभी भी दूध या पानी न बेचें. 

4. खोया बनाने के लिए दूध को न जलाएं. 

5. सुनिश्चित कर लें कि आपकी पत्नी शादी में अपने मायके से अपने वजन के बराबर चांदी और चावल लाए. 

चन्द्र का आठवें भाव में फल यह भाव मंगल और शनि के अंतर्गत आता है. यहां पर स्थित चंद्रमा जातक की शिक्षा पर प्रतिकूल प्रभाव डालता है. लेकिन यदि शिक्षा अच्छी है तो जातक की मां का जीवन छोटा होता है. लेकिन अक्सर यही देखने को मिलता है कि जातक शिक्षा और मां को खो देता है. हालांकि, यदि बृहस्पति और शनि दूसरे भाव में हों तो सातवें घर में बैठे चंद्रमा का बुरा कम हो जाएगा. इस भाव में स्थित चन्द्रमा जातक को पैतृद सम्पत्ति से वंचित करता है. यदि जातक की पैतृक सम्पत्ति के पास कोई कुंआ या तालाब होता है तो जातक के जीवन में चंद्रमा के प्रतिकूल परिणाम देखने को मिलते हैं. 

उपाय: 

1. जुआ और अनैतिकता से बचें. 

2. अपने पूर्वजों के लिए श्रद्धा समारोह आयोजित करें. 

3. कुएं को छत से ढकने के बादघर का निर्माण न करें. 

4. बुजुर्गों और बच्चों के पैर छूकर आशीर्वाद लें. 

5. श्मशान भूमि की सीमा के भीतर स्थित नल या कुंए से पानी लाएं और अपने घर के भीतर रखें. यह सप्तम भाव में स्थित चंद्रमा की सभी बुराइयों दूर करता है. 

6. पूजा स्थल में चना और दाल दान करें. 

चन्द्र का नौवें भाव में फल नौवां घर बृहस्पति, से सम्बंधित होता है जो चंद्रमा का परममित्र है. इसलिए जातक इन दोनों ग्रहों के लक्षण और सुविधाओं को आत्मसात करता है साथ ही अच्छे आचरण, कोमक हृदय, मन से धार्मिक, और धार्मिक कृत्यों तथा तीर्थयात्राओं से प्रेम करने वाला होता है. वह 75 वर्षों तक जीवित रहता है. पाचवें घर में स्थित शुभ ग्रह संतान सुख में वृद्धि और धार्मिक कामों में गहन रुचि विकसित करता है. तीसरे भाव में स्थित मित्र ग्रह पैसे और धन में काफी वृद्धि करता है. 

उपाय: 

1. घर में चंद्रमा से संबंधित चीजें रखें. जैसे अलमारी में चांदी का एक चौकोर टुकड़ा रखें. 

2. मजदूरों को दूध परोसें. 

3. सांप को दूध पिलाएं और मछली के लिए चावल डालें. 

चन्द्र का दसवें भाव में फल   दसवां घर हर तरीके में शनि द्वारा शासित है. यह घर चौथे घर के द्वारा देखा जाता है, जो चंद्रमा द्वारा शासित होता है. इसलिए इस घर में स्थित चंद्रमा जातक को 90 साल की लंबी आयु सुनिश्चित करता है. चंद्रमा और शनि आपस में शत्रु हैं इसलिए, तरल रूप में दवाओं का सेवन जातक को हमेशा हानिकारक साबित होंगी. रात में दूध का सेवन जहर के समान कार्य करता है. यदि जातक चिकित्सक है तो उसके द्वारा रोगी को दी जाने वाली दवाएं यदि शुष्क हों तो मरीज पर इलाज का जादुई प्रभाव पड़ेगा. यदि जातक सर्जन है तो वह सर्जरी के माध्यम से वह महान धन और प्रसिद्धि अर्जित करेगा. यदि दूसरा और चौथा भाव खाली हो तो जातक पर पैसों की बरसात होगी. यदि शनि पहले भाव में स्थित हो तो विपरीत लिंगी के कारण जातक का विनाश हो जाता है, विशेषकर विधवा जातक के विनाश का कारण बनती है. शनि से संबंधित वस्तुएं और व्यवसाय जातक के लिए फायदेमंद साबित होगा.  

उपाय: 

1. धार्मिक स्थानों की यात्रा भाग्य वृद्धि में सहायक होगी. 

2. बारिस अथवा नदी का प्राकृतिक जल किसी कंटेनर (कनस्तर) में भर कर अपने घर के भीतर 15 साल तक रखें. यह दसम भाव में स्थित चंद्रमा के विषाक्त और बुरे प्रभाव को धो देगा.  

3. रात में दूध न पिएं. 

4. दुधारू पशु न तो आपके घर में लंबे समय तक रह पाएंगे और न ही वो आपके लिए फायदेमंद और शुभ साबित होंगे. 

5. शराब, मांस, और व्यभिचार से बचें. 

चन्द्र का ग्यारहवें भाव में फल  यह घर बृहस्पति और शनि से पूरी तरह प्रभावित होता है. इस घर में स्थित हर ग्रह अपने शत्रु ग्रहों और उनके साथ जुडी बातों को नष्ट कर देता है. इस प्रकार यहां स्थित चंद्रमा अपने शत्रु केतू की चीजों को नष्ट कर देता है जैसे जातक के बेटे आदि को. यहां चंद्रमा को अपने शत्रुओं शनि और केतू की संयुक्त शक्ति का सामना करना पडता है, जिससे चंद्रमा कमजोर होता है. ऐसे में यदि केतू चौथे भाव में स्थित है तो जातक की मां का जीवन खतरे में पडेगा. बुध से जुडे व्यापार भी हानिप्रद साबित होंगे. शनिवार के दिन से घर का निर्माण या घर की खरीदी चंद्रमा के शत्रु को बलवान बनाते हैं जो जातक के लिए विनाशकारी साबित होगा. आधी रात के बाद कन्यादान और शुक्रवार के दिन किसी भी शादी समारोह में शामिल होना जातक के भाग्य को नुकसान पहुंचाएगा.  

उपाय: 

1. भैरव मंदिर में दूध बांटे और दूसरों को उदारतापूर्वक दूध का दान करें. 

2. सुनिश्चित करें कि दादी अपने पोते को न देखने पाए. 

3. दूध पीने से पहले सोने के एक टुकड़े को आग में गरम करें और दूध के गिलास में डालकर बुझाएं, इसके बाद दूध पिएं. 

4. 125 पीस पेड़े (मिठाइयां) नदी में बहाएं. 

चन्द्र का बारहवें भाव में फल यह घर चंद्रमा के मित्र बृहस्पति का है. यहां स्थित चंद्रमा मंगल और मंगल से संबंधित चीजों पर अच्छा प्रभाव डालता है, लेकिन यह अपने दुश्मन बुध और केतु तथा उनसे संबंधित चीजों को नुकसान पहुंचाएगा. इसलिए मंगल जिस भाव में बैठा है उससे जुडा व्यापार और चीजें जातक के लिए अत्यधिक लाभकारी रहेंगी. ठीक इसी तरह बुध और केतू जिस घर में बैठे हैं उससे जुडा व्यापार और चीजें जातक के लिए अत्यधिक हानिकारक रहेंगी. बारहवें घर में स्थित चंद्रमा जातक के मन में अप्रत्याशित मुसीबतों और खतरों को लेकर एक साधारण सा डर पैदा करता है. जिससे जातक की नींद और मानसिक शांति भंग होती है. यदि चौथे भाव में स्थित केतू कमजोर और पीडित हो तो जातक के पुत्र और मां पर प्रतिकूल असर पडता है. 

उपाय: 

1. कान में सोना पहनें. दूध में सोना बुझाकर दूध पियें. धार्मिक स्थलों की यात्रा करें. ये उपाय न केवल 12वें भाव के चन्द्र के दुष्प्रभाव को दूर करते बल्कि चौथे भाव के केतू के दुष्प्रभाव को भी दूर करते हैं. 

2. धार्मिक साधु-संतों को कभी भी दूध और भोजन न दें. 

3. स्कूल, कॉलेज या अन्य कोई शैक्षणिक संस्थान न खोलें और निःशुल्क शिक्षा पाने वाले बच्चों की मदद न करें.