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ग्रहों को मजबूत करें भोजन में लें यह आहार

 


आपको यह जानकर आश्चर्य होगा कि आप ग्रह-नक्षत्रों के अशुभ फल को कुछ खाकर शुभ फल में बदल सकते हैं। क्या सचमुच ऐसा हो सकता है? कहते हैं कि जैसा खाओगे अन्न, वैसा बनेगा मन। जैसा बनेगा मन, वैसा होगा आपका वर्तमान और भविष्य। अन्न ही जहर है और अन्न ही अमृत है।

ग्रह और नक्षत्रों का प्रभाव हमारे जीवन में सबसे पहले हमारे शरीर और फिर मन पर ही पड़ता है। शरीर में ग्रहों से संबंधित सभी तत्व मौजूद रहते हैं। ये ग्रह और नक्षत्र उन्हीं तत्वों को प्रभावित करते हैं। जैसे धरती पर स्थित जल को चन्द्रमा प्रभावित करता है उसी तरह वह शरीर में मौजूद जल को भी प्रभावित कर हमारे मन को चंचल या स्थित बनाता है। इसी तरह सभी ग्रह अपने-अपने तत्वों पर अच्छे या बुरे प्रभाव को डालते हैं। 

सूर्य :- सूर्य अगर मजबूत हो तो हमें मान-सम्मान, सुख-समृद्धि मिलती है, पिता का संग और सहयोग मिलता है। अगर सूर्य कमजोर हो तो मुंह में थूक ज्यादा बनेगा, होठों के किनारों पर थूक इकट्ठा हो जाता हैं। पिता से नहीं बनेगी, सरकार से या सरकारी नौकरी में सस्पेंड होना या झूठे आरोप लगना, मान सम्मान को ठेस पहुंचना आदि परेशानी रहेगी।

सूर्य को बल देने के लिए चोकर वाले आटे की रोटी खाएं, फल अधिक खाएं निहार मुंह गुड़ खाकर ऊपर से पानी पीयें, ग्वारपाठा का सेवन करें रोजाना व्यायाम करें सूर्य को जल दें।

चन्द्र:- माँ से दूरी बन जाये, जातक वहमी हो जाये, हाथ-पैर शिथिल पड़ जाएँ, चेहरे पर दाग-धब्बे पड़ जाएँ, मन में उमंग खुशी न रहे तो समझें चंद्रमा खराब है।

चंद्रमा को ठीक करने के लिए दूध में हरी इलायची डालकर पियें, खीर खाएं, केवडा डालकर और चांदी के गिलास में पनीर और दूध पियें लीची, पनीर, नारियल खाये और मखाने की खीर खाने से चन्द्र मजबूत होता है। जंक फूड खाने से बचें क्योंकि इससे राहू एक्टिव हो जाता है।

मंगल :- जल्दी थकना, भाई-बहन से झगड़ा हो या दूरी बन जाये, चोट ज्यादा लगे हड्डियों का टूटना शरीर में खून की कमी हो जाये और शरीर में ऊर्जा की कमी रहें, तो समझ लें मंगल खराब हैं पपीता, चुकंदर खाने से मंगल मजबूत होता है. गुड़ डालकर मीठी लस्सी पियें, मंगल मजबूत होगा। लौकी, तौरी की सब्जी खाएं।

बुध :- बुध कमजोर होगा तो दांत खराब होंगे, जातक अपने विचारों को अभिव्यक्त नहीं कर पायेगा, स्किन (त्वचा) के रोग हो जाते हैं, बुद्धि खराब हो जाती है, मेमोरी कम हो जायें। इसके लिए हरी मिर्च, आंवला, हरी सब्जियों का खूब सेवन करें तांबे के बर्तन में रखा हुआ जल पियें।

गुरु:- गुरु खराब हो तो जातक मोटा होता चला जाता है, आपसी रिश्ते बिगड़ जाते है लीवर खराब हो जाता है अस्थमां सांस की बीमारी हो जाती है। इसके लिए अनार और पपीता, गन्ना खायें, गुड खाएं। सूर्य अगर सम्मान देता है तो गुरु उस सम्मान को बनाये रखता है, इसलिए गुरु को मजबूत रखें सांस की बीमारी हो तो रात को दूध में दो चुटकी हल्दी डालकर पिये. केला के सेवन से भी गुरु मजबूत होता है।

शुक्र :- शुक्र खराब हो तो तन, मन, धन सब पर ग्रहण लग जाता है धन, वैभव, ऐश्वर्य सभी कुछ शुक्र अच्छा हो, तो ही मिलता है अतः शुक्र को बली रखने के लिए साबूदाने की खीर खाएं, पनीर खाएं, छेना तथा छेने की बनी मिठाइयां खायें, दूध पछाड़कर उस पानी को पीने से भी शुक्र मजबूत होता है।

शनि :- व्यावहारिक जीवन में कुछ पाना है तो शनि मजबूत होना चाहिए उड़द, राजमा, खाये चावल आदि में (लौंग) डालकर खाएं, राई का पानी पियें,  शनि मजबूत होगा।

राहु/केतु :- राहु शनि के समान है और केतु मंगल के समान, अतः शनि और मंगल की चीजें खानी चाहिए।

ग्रहो को बलशाली बनाने के लिए करे ये भोजन


1. सूर्य ग्रह :सूर्य की अनुकूलता प्राप्त करने के लिए जातक को अपने आहार में गेहूं, आम, गुड़ आदि का उपयोग करना चाहिए।

2. चन्द्र ग्रह :चन्द्रमा मन का कारक है अत: चन्द्रमा की अनुकूलता के लिए गन्ना, शकर, दूध और दूध से बने पदार्थ, आइसक्रीम और मिठाइयों को अपने आहार में शामिल करना चाहिए।

3. मंगल ग्रह :आपकी कुंडली में यदि मंगल अशुभ है तो अपने आहार में गुड़, मसूर की दाल, अनार, जौ और शहद का उपयोग कर सकते हैं।

4. बुध ग्रह : बुध ग्रह हमारे व्यापार और उद्योग को संचालित करता है। यदि यह कुंडली के नीच भाव में बैठकर अशुभ फल दे रहा है तो मटर, जुवार, कुलपी, हरी दालें, मूंग, हरी सब्जियां आहार में लेनी चाहिए।

5. गुरु ग्रह: यदि गुरु या बृहस्पति ग्रह आपकी कुंडली में अशुभ फल दे रहा है तो चना, चना दाल, बेसन, मक्का, केला, हल्दी, सेंधा नमक, पीली दालें और फलों को अपने भोजन में शामिल करें।

6. शुक्र ग्रह :शुक्र ग्रह जब नीच का होकर अशुभ फल देने लगे तो त्रिफला, दाल चीनी, कमलगट्टा, मिश्री, मूली और सफेद शलजम का प्रयोग करना चाहिए।

7. शनि ग्रह :शनि ग्रह का अशुभ फल जातक को पीड़ा देता है। इसकी अनुकुलता के लिए भोजन में तिल, उड़द, कालीमिर्च, मूंगफली का तेल, अचार, लौंग, तेजपत्ता तथा काले नमक का उपयोग करना चाहिए।

8. व 9. छाया ग्रह राहु और केतु : राहु और केतु की पीड़ा से बचने के लिए उड़द, तिल और सरसों का प्रयोग लाभदायक रहता है।