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ज्योतिष और शिक्षा, विषय के प्रकार और उनके सिग्निफिकैट कारक ग्रह



1 इंजीनियरिंग के मुख्य ग्रह (शनि और मंगल) ग्रहों विषयों
2. इलेक्ट्रोनिक और कॉम इंजी , बुध , गुरु , मंगल और हाउस
3. इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग बुध , मंगल, गुरु
4. मैक् इंजीनियरिंग बुध , मंगल , शनि
5. केमिकल इंजीनियरिंग शुक्र , चंद्रमा
6. खनन इंजीनियरिंग, शनि , बुध , मंगल
7. ऑटोमोबाइल इंजीनियरिंग शुक्र, मंगल
8. एयर कंडीशन इंजी ,शनि , मंगल
9. स्टील इंजी, शनि , मंगल
10. पेट्रो केमिकल ,चंद्रमा , शनि, मंगल, सूर्य
11. विमानन इंजी,शुक्र, मंगल ,बुध , और (3,7,11th )

मेडिकल मुख्य कारक significant  विषय ग्रह:

1. हार्ट विशेषज्ञ ,रवि
2. सर्जन ,सूर्य, मंगल
3. ईएनटी विशेषज्ञ ,सूर्य , बुध
4. बच्चों विशेषज्ञ, सूर्य , गुरु , बुध
5. कैंसर विशेषज्ञ ,सूर्य , गुरु
6. स्त्री रोग विशेषज्ञ ,सूर्य , शुक्र
7. नेत्र विशेषज्ञ ,सूर्य , शुक्र
8. प्लास्टिक सर्जन ,सूर्य , शुक्र
9. पाप विशेषज्ञ सूर्य, शनि
10 आयुर्वेद स्पेशल सूर्य, केतु
11. हिस्टीरिया स्पेशल ,सूर्य, राह
12. डेंटिस्ट ,सूर्य, मंगल , शुक्र व 7h
13. फार्मेसिस्ट सूर्य
14. नर्स, सूर्य, चंद्रमा , बुध

बायो विषय :ग्रह

1. बायोटेक ,सूर्य , गुरु , बुध
2. माइक्रोबायोलॉजी ,गुरु , बुध , मंगल
3. बॉटनी ,सूर्य , गुरु , बुध
4. जूलॉजी ,शनि, गुरु
वाणिज्य विषय गुरु = फाइनेंस ।, बुध = वाणिज्य ग्रहों ,विषय ग्रह
1. वित्तीय सलाहकार, सूर्य , बुध , गुरु , मंगल और 12 वीं h
2. चार्टर्ड लेखा ,सूर्य , बुध , गुरु , मंगल और 3rd h
3. राजस्व सलाहकार ,गुरु , बुध , मंगल, 2 & 11हाउस
4. सांख्यिकी ,शनि, बुध , गुरू
5. बीमा सलाहकार ,शनि, बुध , और 8 th हाउस
6. होटल ,मंगल , शुक्र , चंद्रमा , 4th हाउस
7. बैंकर ,गुरु , बुध
8. एमबीए, सूर्य , गुरु , मंगल, बुध
9. रियल स्टेट एक्सपर्ट, मंगल ग्रह , गुरु , शुक्र , बुध
10 हाइपर स्टोर, मंगल ग्रह ,गुरू , शुक्र , 2 nd हाउस

कला विषयों :मुख्य significant शुक्र ग्रह:

1. अधिवक्ता (कानून): बुध , गुरु , मंगल , शनी और 3rd हाउस
2. शिक्षा (बी.एड.): गुरु , बुध , सूर्य और 4 th हाउस
3. मीडिया : गुरु , बुध , शुक्र और 3th हाउस
4. विज्ञापन :गुरु , बुध ,7, 3 हाउस
5. समाज कल्याण :(एनजीओ) चंद्रमा , शुक्र , गुरु और 11 वीं हाउस
6. निजी सचिव: बुध , मंगल, गुरु और 3 rd हाउस
7. फ्रंट एंड मैनेजमेंट: बुध , गुरु और 3rd हाउस
8. फोटोग्राफर: सूर्य , शुक्र , चंद्रमा
9. फिल्म और संगीत कैरियर:शुक्र , बुध ,गुरु व 5 th हाउस
10 डेयरी उत्पादन एवं मैनेजमेंट: शुक्र , चंद्रमा , मंगल और 6 th हाउस
11.Textile डिजाइनिंग :शुक्र , बुध , चंद्रमा व 5th हाउस
12. उद्यमिता Entrepreneurshipएवं मैनेजमेंट :गुरु , बुध , मंगल, 7th हाउस
13. पर्यटन और एयरलाइन मैनेजमेंट : शुक्र , बुध , 9 एवं (3,7,11) हाउस
14. खाद्य विज्ञान एवं गुणवत्ता :गुरु , मंगल
15. परिधान प्रोड और एक्सपोर्ट : शुक्र , बुध , मंगल 9 वीं और 7 वीं हाउस
16. विदेशी भाषा :केतु , बुध , गुरु
17. कर्रिएर इन स्पोर्ट्स :मंगल ,गुरु ,सुर्य ,शुक्र और 5th हाउस
18. राजनीति शास्त्र :गुरु,शुक्र
19. गहने डिजाइन :,शुक्र , बुध ,गुरु ,मंगल व 5 th हाउस
20. निजी खुफिया कैरियर:शनि , बुध
नौकरी कौन सी होगी वह 10th हाउस पर निर्भर करती है:
10 वीं हाउस के मुख्य significator:कारक :
10 वीं हाउस मै बैठे ग्रह का प्रभाव :

विषय के प्रकार :मुख्य significant ग्रह:

1. इंजीनियरिंग मुख्य ग्रह (शनि और मंगल)
2. इलेक्ट्रोनिक इंजी :सूर्य , बुध गुरु , मंगल और3rd हाउस
3. इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग: बुध , मंगल, गुरु
4. मैक् इंजीनियरिंग: बुध , मंगल , शनि
5. केमिकल इंजीनियरिंग: शुक्र , चंद्रमा
6. खनन इंजीनियरिंग : शनि , बुध , मंगल
7. ऑटोमोबाइल इंजीनियरिंग: शुक्र , मंगल
8. एयर -कंडीशन इंजी :शनि , मंगल
9. स्टील इंजी: शनि , मंगल
10 पेट्रो केमिकल :चंद्रमा , शनि, मंगल, सूर्य
11. एविएशन इंजी :शुक्र , मंगल , बुध और सूर्य , (3,7,11) हाउस

जातक के शिक्षा योग कैसे हैं? यह एक सहज जिज्ञासा होती है जिसके बारे में जन्मकुंडली के चतुर्थ भाव के अधिपति की स्थिति से सहज ही जानकारी प्राप्त की जा सकती है. यानि चतुर्थेश कुंडली के जिस भाव में बैठा हो उसके अनुसार परिणाम प्राप्त होते हैं. नीचे हम सभी भावों की स्थिति के अनुसार फ़ल बता रहे हैं.

प्रथम भाव - अगर चतुर्थेश कुंडली के प्रथम भाव में बैठा हो तो जातक जीवन में अच्छी विद्या प्राप्त करता है जो उसको लाभदायक रहती है.

द्वितीय भाव - अगर चतुर्थेश कुंडली के द्वितीय भाव में बैठा हो तो ऐसा जातक विद्या अवश्य प्राप्त करता है भले ही उसके पालकों की आर्थिक हैसियत उसे पढाने लायक ना हो तो भी.

तृतीय भाव - अगर चतुर्थेश कुंडली के तृतीय भाव में बैठा हो तो जातक की विद्या प्राप्त करने में उसकी माता की विशेष भूमिका होती है. माता की मेहनत से ऐसा जातक शिक्षा प्राप्त कर लेता है.

चतुर्त भाव - अगर चतुर्थेश कुंडली के चतुर्थ भाव में ही बैठा हो तो ऐसा जातक बहुत ही उत्तम विद्या प्राप्त करता है.

पंचम भाव - अगर चतुर्थेश कुंडली के पंचम भाव में बैठा हो तो ऐसा जातक अनेक प्रकार की बाधाओं के साथ विद्या प्राप्त करता है और जातक अपने जीवन में ऐसी विद्या का कोई उपयोग नही कर पाता है.

षष्ठ भाव - अगर चतुर्थेश कुंडली के षष्ठ भाव में बैठा हो तो ऐसे जातक को विद्याध्ययन में बहुत अडेचने आती हैं परंतु उसे विद्या लाभकारी होती है.

सप्तम भाव - अगर चतुर्थेश कुंडली के सप्तम भाव में बैठा हो तो और ऐसे जातक की विद्या २२ साल की उम्र के पहले पूर्ण हो जाती है और उससे जातक लाभ प्राप्त करता है. यदि २२ साल की उम्र के पहले विवाह हो जाये तो उसकी विद्या प्राप्ति में विघ्न उत्पन्न हो जाते हैं.

अष्टम भाव - अगर चतुर्थेश कुंडली के अष्टम भाव में बैठा हो तो ऐसे जातक को मातृ सुख में कमी होती है और मातृ सुख के अभाव वश विद्या में न्युनता.

नवम भाव - अगर चतुर्थेश कुंडली के नवम भाव में बैठा हो तो ऐसा जातक प्रचारक, आलोचक, एवम शिक्षक होता है चाहे पूरी विद्या प्राप्त की हो या नही.

दशम भाव - अगर चतुर्थेश कुंडली के दशम भाव में बैठा हो तो ऐसे जातक को स्कूल जाने में डर लगता है और विद्या में कमी रहती है. ऐसा जातक अपने पिता का कार्य संभालता है.

एकादशम भाव - अगर चतुर्थेश कुंडली के एकादश भाव में बैठा हो तो ऐसा जातक अनेक रूकावटों के साथ विद्या प्राप्त करता है.

द्वादश भाव - ऐसा जातक घर के बाहर रहकर विद्या प्राप्त करता है. ऐसा जातक पढे तो पूरा पढे वर्ना एकांत में बैठा विद्या प्राप्त करने के सपने लेने वाला होता है.

पूजापाठ से जुड़ी हुईं महत्वपूर्ण बातें


★ एक हाथ से प्रणाम नही करना चाहिए।

★ सोए हुए व्यक्ति का चरण स्पर्श नहीं करना चाहिए। 

★ बड़ों को प्रणाम करते समय उनके दाहिने पैर पर दाहिने हाथ से और उनके बांये पैर को बांये हाथ से छूकर प्रणाम करें। 

★ जप करते समय जीभ या होंठ को नहीं हिलाना चाहिए। इसे उपांशु जप कहते हैं। इसका फल सौगुणा फलदायक होता हैं।

★ जप करते समय दाहिने हाथ को कपड़े या गौमुखी से ढककर रखना चाहिए। 

★ जप के बाद आसन के नीचे की भूमि को स्पर्श कर नेत्रों से लगाना चाहिए।

★ संक्रान्ति, द्वादशी, अमावस्या, पूर्णिमा, रविवार और सन्ध्या के समय तुलसी तोड़ना निषिद्ध हैं।

★ दीपक से दीपक को नही जलाना चाहिए।

★ यज्ञ, श्राद्ध आदि में काले तिल का प्रयोग करना चाहिए, सफेद तिल का नहीं। 

★ शनिवार को पीपल पर जल चढ़ाना चाहिए। पीपल की सात परिक्रमा करनी चाहिए। परिक्रमा करना श्रेष्ठ है, 

★ कूमड़ा-मतीरा-नारियल आदि को स्त्रियां नहीं तोड़े या चाकू आदि से नहीं काटें। यह उत्तम नही माना गया हैं। 

★ भोजन प्रसाद को लाघंना नहीं चाहिए।

★  देव प्रतिमा देखकर अवश्य प्रणाम करें।

★  किसी को भी कोई वस्तु या दान-दक्षिणा दाहिने हाथ से देना चाहिए।

★  एकादशी, अमावस्या, कृृष्ण चतुर्दशी, पूर्णिमा व्रत तथा श्राद्ध के दिन क्षौर-कर्म (दाढ़ी) नहीं बनाना चाहिए ।

★ बिना यज्ञोपवित या शिखा बंधन के जो भी कार्य, कर्म किया जाता है, वह निष्फल हो जाता हैं।

★ शंकर जी को बिल्वपत्र, विष्णु जी को तुलसी, गणेश जी को दूर्वा, लक्ष्मी जी को कमल प्रिय हैं।

★ शंकर जी को शिवरात्रि के सिवाय कुंुकुम नहीं चढ़ती।

★ शिवजी को कुंद, विष्णु जी को धतूरा, देवी जी  को आक तथा मदार और सूर्य भगवानको तगर के फूल नहीं चढ़ावे।

★ अक्षत देवताओं को तीन बार तथा पितरों को एक बार धोकर चढ़ावंे।

★ नये बिल्व पत्र नहीं मिले तो चढ़ाये हुए बिल्व पत्र धोकर फिर चढ़ाए जा सकते हैं।

★ विष्णु भगवान को चावल गणेश जी  को तुलसी, दुर्गा जी और सूर्य नारायण  को बिल्व पत्र नहीं चढ़ावें।

★ पत्र-पुष्प-फल का मुख नीचे करके नहीं चढ़ावें, जैसे उत्पन्न होते हों वैसे ही चढ़ावें।

★ किंतु बिल्वपत्र उलटा करके डंडी तोड़कर शंकर पर चढ़ावें। 

★पान की डंडी का अग्रभाग तोड़कर चढ़ावें।

★ सड़ा हुआ पान या पुष्प नहीं चढ़ावे।

★ गणेश को तुलसी भाद्र शुक्ल चतुर्थी को चढ़ती हैं।

★ पांच रात्रि तक कमल का फूल बासी नहीं होता है।

★ दस रात्रि तक तुलसी पत्र बासी नहीं होते हैं।

★ सभी धार्मिक कार्यो में पत्नी को दाहिने भाग में बिठाकर धार्मिक क्रियाएं सम्पन्न करनी चाहिए।

★ पूजन करनेवाला ललाट पर तिलक लगाकर ही पूजा करें।

★ पूर्वाभिमुख बैठकर अपने बांयी ओर घंटा, धूप तथा दाहिनी ओर शंख, जलपात्र एवं पूजन सामग्री रखें।

★ घी का दीपक अपने बांयी ओर तथा देवता को दाहिने ओर रखें एवं चांवल पर दीपक रखकर प्रज्वलित करें। 

आप सभी को निवेदन है अगर हो सके तो और लोगों को भी आप इन महत्वपूर्ण बातों से अवगत करा सकते हैं

पूजापाठ में दीपक जलाने के वैदिक नियम


दीप प्रकाश का द्योतक है, तो प्रकाश ज्ञान का। परमात्मा से हमें संपूर्ण ज्ञान मिले इसीलिए दीप प्रज्वलन  करने की परंपरा है। कोई भी पूजा हो या किसी समारोह का शुभारंभ। समस्त शुभ कार्यों का आरंभ दीप  प्रज्वलन से होता है। 

जिस प्रकार दीप की ज्योति हमेशा ऊपर की ओर उठी रहती है, उसी प्रकार मानव  की वृत्ति भी सदा ऊपर ही उठे, यही दीप प्रज्वलन का अर्थ है। अत: समस्त कल्याण की चाह रखने वाले  मनुष्य को दीप जलाते समय यह मंत्र अवश्य पढ़ना चाहिए। निश्चित ही आपका कल्याण होगा।  

1.दीपक जलाते समय और मंदिर में आरती लेते समय इस मंत्र का जाप करना चाहिए।

मंत्र- शुभम करोति कल्याणं, आरोग्यं धन संपदाम्। शत्रु बुद्धि विनाशाय, दीपं ज्योति नमोस्तुते।।

इस मंत्र का सरल अर्थ यह है कि शुभ और कल्याण करने वाली, आरोग्य और धन संपदा देने वाली, शत्रु बुद्धि का नाश और शत्रुओं पर विजय दिलाने वाली दीपक की ज्योति को हम नमस्कार करते हैं।

इस प्रकार दीपक जलाकर मंत्र बोलने से घर-परिवार में सुख-समृद्धि बनी रहती है और शत्रुओं से हमारी रक्षा होती है।

2.देवी-देवताओं के सामने घी का दीपक अपने बाएं हाथ की ओर लगाना चाहिए। तेल का दीपक दाएं हाथ की ओर लगाना चाहिए।

3.इस बात का ध्यान रखें कि पूजा के बीच में दीपक बुझना नहीं चाहिए। ऐसा होने पर पूजा का पूर्ण फल प्राप्त नहीं हो पाता है। अगर दीपक बुझ जाता है तो तुरंत जला देना चाहिए और भगवान से भूल-चूक की क्षमायाचना करनी चाहिए।

4.घी के दीपक के लिए सफेद रुई की बत्ती उपयोग करना चाहिए। जबकि तेल के दीपक के लिए लाल धागे की बत्ती ज्यादा शुभ रहती है।

5.पूजा में कभी भी खंडित दीपक नहीं जलाना चाहिए। पूजा-पाठ में खंडित चीजें शुभ नहीं मानी जाती है।

6.अगर घर में नियमित रूप से दीपक जलाया जाता है तो वहां हमेशा सकारात्मक ऊर्जा बनी रहती है। दीपक के धुएं से वातावरण में मौजूद हानिकारक सूक्ष्म कीटाणु भी नष्ट हो जाते हैं।

7.शास्त्रों के अनुसार रोज शाम को मुख्य द्वार के पास दीपक जलाना चाहिए। इससे देवी लक्ष्मी प्रसन्न होती हैं। इसी वजह से शाम को मेन गेट के पास दीपक जलाने की परंपरा चली आ रही है।

जानिये गृह शांति के आसान से उपाय


1. आजकल परिवार में पिता पुत्र के बीच में भी बहुत विरोध हो जाते है इससे परिवार में शांति भंग होने के साथ साथ और भी बहुत सी समस्याएँ उत्पन्न हो जाती है कई बार तो परिवार में विघटन की स्थिति भी आ जाती है इससे बचने के लिए कुछ बहुत ही अचूक उपाय बताए जा रहे है । 

2. यदि पिता की और से नाराजगी है तो पुत्र रविवार को सवा किलो गुड़ बहते हुए पानी में प्रवाहित करे …उसे ऐसा लगातार तीन रविवार को करना है । पिता की नाराज़गी जल्दी दूर हो जाएगी । 

3. पुत्र को नियमित रूप से गुड़,लाल फूल मिलाकर जल सूर्य देव को अर्पित करना चाहिए। पिता का स्नेह पुन: पुत्र पर बन जायेगा । 

4. रविवार को पुत्र यदि अपने पिता को कोई भी लाल रंग का उपहार दे तो अति शीघ्र पिता का पुत्र से विरोध ख़त्म हो जायेगा । 

5. यदि पुत्र की पिता से न बन रही हो तो अमावस्या,या ग्रहण के दिन पुत्र पिता के जूतों से पुराने मोज़े निकाल कर उनमें बिलकुल नए मोज़े रख दे, ऐसा करने से दोनों के बीच चल रहा गतिरोध अवश्य ही दूर हो जाएगा। 

6. यदि पुत्र रुष्ट है तो पिता प्रत्येक शनिवार को सुबह पीपल में मीठा जल एवं शाम को सरसों के तेल का दीपक जलायें या सरसों के तेल की धार अर्पित करें तो बहुत ही जल्दी पिता पुत्र के मध्य अवरोध ख़त्म हो जायेगा । 

7. शनिवार को पिता यदि अपने पुत्र को कोई भी नीले रंग का उपहार दे तो अति शीघ्र पुत्र का पिता से मतभेद समाप्त हो जाता है । 

8. बहन भाइयों के बीच में झगड़ा या मनमुटाव हो तो मंगलवार को सवा किलो गुड जमीन में दबाएँ ....सम्बन्ध अच्छे हो जायेंगे । 

9. यदि किसी महिला का ससुर उससे नाराज रहता हो तो वह महिला प्रतिदिन जल में गुड़ मिलाकर सूर्यदेव को अध्र्य दे तो उसकी यह समस्या दूर हो जाती है। 

10. किसी महिला का उसकी सास के साथ झगड़ा होता रहता हो तो वह स्त्री पूर्णिमा की रात में खीर बनाकर चंद्रमा की किरणों में रखे और फिर वह खीर अपनी सास को खिला दे। सास-बहू में बनने लगेगी।

11. यह कुछ ऐसे छोटे छोटे और सहज उपाय है जिनको अपनाकर हर व्यक्ति अपने परिवार में प्रेम और सौहार्दय के वातावरण का निर्माण कर सकता है ।

कुंडली में ग्रहदशा के अनुसार अपनाये जीवन शैली


1. जातक को यदि केमद्रुम दोष या विषदोष हो,ऐसे जातक कोई भी उपाय लंबे समय तक नही कर सकते..बहुत जल्दी निराश हो जाते है..इनका ज्योतिषीय उपायो या भगवानों से बहुत जल्दी भरोसा उठ जाता है..ये कैसे लोगो के बीच रहते है इनकी सोच को बहुत प्रभावित करता है..

ये लोग मंत्र जाप या पूजा में भी बैठे हो ध्यान केंद्रित नही कर पाते,मोबाइल में या इधर-उधर के विचारों में खोये रहते है...ऐसी महिलाये 30 में से कम से कम 4 दिन सब्जी-दाल में नमक डालना भूल जाती है या कम डालती है..

2.कुंडली मे यदि केंद्र में एक भी ठोस ग्रह ना हो तो जातक को हर क्षेत्र में अन्य लोगो के अपेक्षा अधिक मेहनत करनी पड़ती है...ऐसे लोग भीड़ में खुद को बहुत असहज महसूस करते है..उनको कभी 10 लोगो के बीच बोलने को कहा जाये तो घबराहट होती है.Self-Confidence बहुत कम होता है..

3.केंद्र में जितने अधिक सौम्य ग्रह होंगे,जातक के विनम्र होने का आप उतना अनुमान लगा सकते हो..जितने अधिक क्रूर ग्रह होंगे जातक की वाणी और व्यवहार उतना अकड़ू होंगा...

4.जातक सुबह जितने जल्दी उठेगा,गुरु और बुध उतना बढ़िया प्रभाव देंगे..सूर्योदय तक उठे तो सूर्य भी बढ़िया फल देंगा..9-10 बजे उठे ग्रह ठीक फल नही देते..11 बजे या उसके बाद उठे तो दिन भर राहू और शनि आप पर हावी रहेंगे..

5.जातक सूर्यास्त के पहले जितना अधिक स्वच्छ पानी पियेगा,चंद्रमा अच्छे परिणाम देंगा...मंगल आपको परेशान कर रहा हो तो दूध में शहद डालकर पीना चालू कीजिये..गुरु को बल देना हो तो दूध में हल्दी/केशर डालकर पीजिए...इसी तरह शुक्र को बल देना है तो दूध के साथ अश्वगंधा लीजिए...आप जितनी अधिक कॉफी पियोगे राहू आप पर उतना ही हावी रहेगा,कभी गौर करना अतः लंबे समय तक कॉफ़ी नही पीनी चाहिए शौकीयतौर पर पीजिये..

6.योगकारक ग्रहो से संबंधित रंग के वस्त्र धारण करने की कोशिश करे...पैंट कोई भी चलेगा पर शर्त,t-shirt, Hairband, दुपट्टा आदि...जो ग्रह समस्या दे रहे उनके रंग इस्तेमाल कम से कम करे..संभव हो तो नैलपैंट भी योगकारक में से किसी एक ग्रह का (जिसका रंग भड़काऊ ना हो) वो प्रयोग करे...

7.मोबाइल या लैपटॉप पर सन्नी लियोन या शाहरुख खान की जगह संभव हो तो श्रीयंत्र या भगवानों की फ़ोटो रखे,मन शांत रहेगा..

8.उम्र के पड़ाव के हिसाब से ही ग्रह और उनके उपाय काम करते है अतः छोटे बच्चो और बुजुर्गों पर भी ये बात लागू होती है..इनको सिर्फ भगवान की भक्ति फायदा देती है..रत्न अपना पूरा प्रभाव इनके स्किन और रक्तप्रवाह के कारण नही दिखा पाते..जिस तरह यौन उत्तेजनाओं की गोली का जितना फायदा युवा को हो सकता है उतना फायदा ना तो किसी बच्चे को होगा ना ही किसी बुजुर्ग,यही सूत्र रत्नों के ऊपर लागू होता है...

9.ग्रहो से बलवान होता है समय(काल)...समय अच्छा हो तो ग्रह भी आपको बुरा फल नही देते और जब समय खराब हो तो योगकारक ग्रह भी आपको अकेला छोड़कर हिमालय में तपस्या करने चले जाते है या फिर "आउट ऑफ कवरेज मोड" पर चले जाते है सो समय कैसा भी हो भक्ति में अपना समय अवश्य लगाये..

दुख में स्मिरण सब करे,सुख में करे ना कोय..
जो सुख में भी स्मिरण करे,तो दुख काहे को होय...

गौ माता से जुड़ी कुछ रोचक जानकारियाँ



1. गौ माता जिस जगह खड़ी रहकर आनंदपूर्वक चैन की सांस लेती है । वहां वास्तु दोष समाप्त हो जाते हैं । 
      
2. जिस जगह गौ माता खुशी से रभांने लगे उस जगह देवी देवता पुष्प वर्षा करते हैं । 

3. गौ माता के गले में घंटी जरूर बांधे ; गाय के गले में बंधी घंटी बजने से गौ आरती होती है । 

4. जो व्यक्ति गौ माता की सेवा पूजा करता है उस पर आने वाली सभी प्रकार की विपदाओं को गौ माता हर लेती है । 

5. गौ माता के खुर्र में नागदेवता का वास होता है । जहां गौ माता विचरण करती है उस जगह सांप बिच्छू नहीं आते । 

6. गौ माता के गोबर में लक्ष्मी जी का वास होता है ।

7. गौ माता कि एक आंख में सुर्य व दूसरी आंख में चन्द्र देव का वास होता है ।

8. गौ माता के दुध मे सुवर्ण तत्व पाया जाता है जो रोगों की क्षमता को कम करता है। 

9. गौ माता की पूंछ में हनुमानजी का वास होता है । किसी व्यक्ति को बुरी नजर हो जाये तो गौ माता की पूंछ से झाड़ा लगाने से नजर उतर जाती है । 

10. गौ माता की पीठ पर एक उभरा हुआ कुबड़ होता है , उस कुबड़ में सूर्य केतु नाड़ी होती है । रोजाना सुबह आधा घंटा गौ माता की कुबड़ में हाथ फेरने से रोगों का नाश होता है । 

11. एक गौ माता को चारा खिलाने से तैंतीस कोटी देवी देवताओं को भोग लग जाता है ।

12. गौ माता के दूध घी मख्खन दही गोबर गोमुत्र से बने पंचगव्य हजारों रोगों की दवा है । इसके सेवन से असाध्य रोग मिट जाते हैं ।

13. जिस व्यक्ति के भाग्य की रेखा सोई हुई हो तो वो व्यक्ति अपनी हथेली में गुड़ को रखकर गौ माता को जीभ से चटाये गौ माता की जीभ हथेली पर रखे गुड़ को चाटने से व्यक्ति की सोई हुई भाग्य रेखा खुल जाती है । 

14. गौ माता के चारो चरणों के बीच से निकल कर परिक्रमा करने से इंसान भय मुक्त हो जाता है ।

15. गौ माता के गर्भ से ही महान विद्वान धर्म रक्षक गौ कर्ण जी महाराज पैदा हुए थे। 

16. गौ माता की सेवा के लिए ही इस धरा पर देवी देवताओं ने अवतार लिये हैं । 

17. जब गौ माता बछड़े को जन्म देती तब पहला दूध बांझ स्त्री को पिलाने से उनका बांझपन मिट जाता है । 

18. स्वस्थ गौ माता का गौ मूत्र को रोजाना दो तोला सात पट कपड़े में छानकर सेवन करने से सारे रोग मिट जाते हैं । 

19. गौ माता वात्सल्य भरी निगाहों से जिसे भी देखती है उनके ऊपर गौकृपा हो जाती है ।

20. काली गाय की पूजा करने से नौ ग्रह शांत रहते हैं । जो ध्यानपूर्वक धर्म के साथ गौ पूजन करता है उनको शत्रु दोषों से छुटकारा मिलता है । 

21. गाय एक चलता फिरता मंदिर है । हमारे सनातन धर्म में तैंतीस कोटि देवी देवता है ,
हम रोजाना तैंतीस कोटि देवी देवताओं के मंदिर जा कर उनके दर्शन नहीं कर सकते पर गौ माता के दर्शन से सभी देवी देवताओं के दर्शन हो जाते हैं । 

22. कोई भी शुभ कार्य अटका हुआ हो बार बार प्रयत्न करने पर भी सफल नहीं हो रहा हो तो गौ माता के कान में कहिये रूका हुआ काम बन जायेगा !

 23. गौ माता सर्व सुखों की दातार है । 

हे मां आप अनंत ! आपके गुण अनंत ! इतना मुझमें सामर्थ्य नहीं कि मैं आपके गुणों का बखान कर सकूं ।

जय गौ माता

ज्योतिष शास्त्र में हल्दी का महत्व और उसके चमत्कारिक प्रयोग


हल्दी एक विशेष प्रकार की औषधि है, जिसमें दैवीय गुण भी हैं| हिन्दू धर्म में हल्दी को शुभ और मंगलकारी माना गया है|हल्दी भोजन में स्वाद के साथ जीवन में संपन्नता भी लाती है|यह मुख्य रूप से विषरोधक होती है और नकारात्मक ऊर्जा को नष्ट करती है| इसलिए हल्दी का प्रयोग हवन और औषधियों में भी किया जाता है|

1. पूजा के समय कलाई में या गर्दन पर हल्दी का छोटा सा टीका लगाने पर बृहस्पति मजबूत होता है और वाणी में मजबूती आती है।

2. हल्दी का दान करना शुभ माना जाता है। इससे कई स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों का अंत होता है। गुरु ग्रह में अनुकूलता आती है।

3. पूजा के बाद माथे पर हल्दी का तिलक लगाने से विवाह संबंधी कार्यों में सफलता मिलती है।

4. घर की बाउंड्री की दीवार पर अगर हल्दी की रेखा बना दी जाए तो घर में नकारात्मक शक्तियों का प्रवेश नहीं होता।

5. नहाते समय अगर नहाने के पानी में चुटकी भर हल्दी डालकर नहाया जाए तो यह शारीरिक और मानसिक शुद्धता देती है। करियर में सफलता के लिए भी यह प्रयोग अचूक है।

6. हल्दी की गांठ पर मौली लपेट कर सिरहाने रखा जाए तो बुरे सपने नहीं आते। बाहरी हवा से भी बचाव होता है।

7. प्रति गुरुवार श्री गणेश को मात्र एक चुटकी हल्दी चढ़ाई जाए तो विवाह संबंधी रुकावटें दूर होती हैं।

8. भगवान विष्णु और लक्ष्मी की प्रतिमा के पीछे हल्दी की पुड़िया छुपा कर रखने से अति शीघ्र विवाह के योग बनते हैं।

9. हल्दी के प्रयोग से जीवन में संपन्नता आती है। यह मानस की नकारात्मकता दूर करती है। इसीलिए इसे हवन में भी इस्तेमाल किया जाता है।

10. सूर्य को हल्दी मिला जल चढ़ाने से कन्या की शादी मनचाहे वर से होती है।

11. हल्दी की माला से कोई भी मंत्र जप किया जाए तो विलक्षण बुद्धि के स्वामी हो सकते हैं।

दैनिक जीवन में वास्तु के कुछ उपयोगी नियम


सीढियों के निचे कभी भी टॉयलेट बाथरूम रसोई आदि नही बनाना चाहिए वरना घर की पुत्रवधू या बेटियां हमेशा किसी न किसी कारण से परेशान रहेगी | 

आग बिजली से सम्बन्धित उपकरण हमेशा आग्नेय कोण यानी की दक्षिण पूर्व में रखे | इन्हें ईशान कोण में रखने से हमेशा ही घर के सदस्यों को कोई न कोई मानशिक परेशानी बनी रहती है | 

जहां तक सम्भव हो घर को हमेशा चोरस आकार का बनाना चाहिए | 

घर में दक्षिण पश्चिम कोण और ये दोनों दिशा हमेशा भारी और ऊँची होनी चाहिए | 
ईशान कोण हमेशा निचा होना चाहिए और ईशान कोण यदि खाली रखा जाए तो सबसे बेहतर होता है | 
वैसे ईशान कोण में पूजा का स्थान , पानी का स्थान अवस्य बनाया जा सकता है \ 

घर के ब्रह्म स्थान यानी की केंद्र स्थान हमेशा खाली रखना चाहिए वहां कोई भी दिवार पिल्लर या कोई भारी समान कभी नही रखना चाहिए \ 

घर में कोई भी जंगल या म्यूजियम की वस्तु नही रखनी चाहिए और न ही घर में कोई क्रूर फोटो जिसमे किसी के उपर अत्याचार होता हुआ प्रतीत हो रहा हो वो रखनी चाहिए | 

टॉयलेट की सिट लगाते समय इस बात का ध्यान अवस्य रखना चाहिए की बैठते समय बैठने वाले का मुह पूर्व की तरफ न हो . यदि ये दक्षिण या उतर की तरफ हो तो सबसे बेहतर होता है  \ 

कीमती समान की अलमारी आदि हमेशा उतर मुखी रखे | 

चोराहे के उपर मकान लेने से हमेशा बचना चाहिए | इसी प्रकार किसी बड़े अधिकारी या राजनेता के मकान के पास का मकान कई बार खराबी का बड़ा कारण बन जाता है | इस से जातक के अपमानित होने के चांस ज्यादा रहते है | घर के पास पीपल या कांटेदार पेड़ पोधे नही होने चाहिए | 

हमारे घर का वातावरण हमे सबसे ज्यादा प्रभावित करता है इसिलिय घर में हमेशा अकारात्मक ऊर्जा देने वाले समान रखने चाहिए \ घर में कभी भी टूटे हुवे चश्मे . मेज कुसी , टुटा हुआ शीशा बंद घड़ी आदि नही रखनी चाहिए और न ही ऐसी चीजों को किसी चीज से चिपकाकर दोबारा रखनी चाहिए | 

कांटेदार पोधे के साथ कभी भी मनी प्लांट या तुलसी का पोधे एक ही गमले में नही लगाने चाहिए \ 

मित्रों ये कुछ वास्तु नियम है जिनका पालन करके आप अपने घर में सकारात्मक उर्जा का संचार कर सकते है |

ये आसान से टोटके जो करवा सकते हैं आपके घर में बरकत



1. घर में तुलसी का पौधा अवश्य लगायें और हर शाम को वहाँ घी का दीपक जलायें। ऐसा करने से घर में नकारात्मक तरंगों का वास नहीं होता है साथ ही लक्ष्मी जी भी प्रसन्न होती हैं।

2. जिस बाक्स में आप पैसे रखते हैं उसमें लाल रंग का कपडा बिछायें और साथ ही चावल यानि की साबुत चावल की एक पोटली बना कर रख दें। ऐसा करना बहुत ही शुभ माना जाता है साथ ही ऐसा करने से लक्ष्मी जी सदैव आपके पास बनी रहती है। पूजा घर में भी लाल कपड़ा बिछाकर रखें और हर शाम को तीन अगरबत्तियाँ जलायें।

3. घर की झाड़ू को कभी भी खुले में ना रखें और ना ही कभी उस पर पैस रखें। अगर ऐसा करते हैं तो तुरंत बंद कर दें क्योंकि ऐसे लक्ष्मी जी का अपमान होता है और वो कभी खुश नहीं होती हैं। झाडू को सदैव ऐसे स्थान पर ऱखें जहाँ से उसे कोई ना देख पायें।

4. जब भी घर में पोंछा लगाये हमेशा पानी में नमक डाल दें। ऐसा करने से घर में अगर नकारात्मक शक्तियों का वास नहीं होता है साथ ही वो घर से दूर रहती हैं ।

5. घर के मुख्य द्वार पर गणेश जी की प्रतिमा लगाना बहुत ही शुभ माना जाता है। ऐसा करने से घर पर गणेश जी की कृपा सदैव बनी रहती है ।

6. घर में कभी भी बिस्तर पर खाना ना खायें। ऩा ही ऐसे बिस्तर पर सोये जो गंदा हो। बिस्तर पर खाना खाना अशुभ माना जाता है। ऐसा करना लक्ष्मी को रुष्ठ करने के बराबर है।

7. अगर घर में कोई व्यक्ति बहुत ही चिड़चिड़ा हो चुका है और वो भी बिना वजह तो थोड़ी सी राई, साबुत मिर्च, नमक और आटा लें और उस व्यक्ति के ऊपर से उसार कर जला दें। जब जलायें तो उस व्यक्ति को उस आग को देखते रहने के लिए बोलें। ऐसा करने से चढ़ी हुयी नजर उतर जाती है ।

8. घर में धन प्राप्ति के लिए हनुमान जी की फोटो अथवा प्रतिमा लगाये जिसमें वो उड़ रहे हों। ऐसी प्रतिमा बहुत ही शुभ मानी जाती है और उस प्रतिमा की विधि पूर्वक पूजा करनी चाहिए।

9. जब भी खाना बनायें पहली रोटी गाय की निकालें। इसके अलावा जब तवा गरम हो जाये तो उसे पानी की छींटे डाले और फिर रोटी। ऐसा करने से घर में बरकत होती है।

10. शानिवार, मंगरवार और बृहस्पतिवार को ना कपड़े धोये और ना ही सिर, ना ही नाखून काटें। ऐसा करने से धन घर में नहीं रुकता है। इस दिन सिर में तेल भी ना लगायें। ब्रहस्पतिवार को पीले फल ना खायें खासकर केले क्योंकि इसकी पूजा होती है।

ग्रहो को बलशाली बनाने के लिए करे ये भोजन


1. सूर्य ग्रह :सूर्य की अनुकूलता प्राप्त करने के लिए जातक को अपने आहार में गेहूं, आम, गुड़ आदि का उपयोग करना चाहिए।

2. चन्द्र ग्रह :चन्द्रमा मन का कारक है अत: चन्द्रमा की अनुकूलता के लिए गन्ना, शकर, दूध और दूध से बने पदार्थ, आइसक्रीम और मिठाइयों को अपने आहार में शामिल करना चाहिए।

3. मंगल ग्रह :आपकी कुंडली में यदि मंगल अशुभ है तो अपने आहार में गुड़, मसूर की दाल, अनार, जौ और शहद का उपयोग कर सकते हैं।

4. बुध ग्रह : बुध ग्रह हमारे व्यापार और उद्योग को संचालित करता है। यदि यह कुंडली के नीच भाव में बैठकर अशुभ फल दे रहा है तो मटर, जुवार, कुलपी, हरी दालें, मूंग, हरी सब्जियां आहार में लेनी चाहिए।

5. गुरु ग्रह: यदि गुरु या बृहस्पति ग्रह आपकी कुंडली में अशुभ फल दे रहा है तो चना, चना दाल, बेसन, मक्का, केला, हल्दी, सेंधा नमक, पीली दालें और फलों को अपने भोजन में शामिल करें।

6. शुक्र ग्रह :शुक्र ग्रह जब नीच का होकर अशुभ फल देने लगे तो त्रिफला, दाल चीनी, कमलगट्टा, मिश्री, मूली और सफेद शलजम का प्रयोग करना चाहिए।

7. शनि ग्रह :शनि ग्रह का अशुभ फल जातक को पीड़ा देता है। इसकी अनुकुलता के लिए भोजन में तिल, उड़द, कालीमिर्च, मूंगफली का तेल, अचार, लौंग, तेजपत्ता तथा काले नमक का उपयोग करना चाहिए।

8. व 9. छाया ग्रह राहु और केतु : राहु और केतु की पीड़ा से बचने के लिए उड़द, तिल और सरसों का प्रयोग लाभदायक रहता है।

कुंडली से जाने अपने बारे में 9 बातें काम की


1.जातक को यदि के मद्रुम दोष या विषदोष हो,ऐसे जातक कोई भी उपाय लंबे समय तक नही कर सकते..बहुत जल्दी निराश हो जाते है..इनका ज्योतिषीय उपायो या भगवानों से बहुत जल्दी भरोसा उठ जाता है..ये कैसे लोगो के बीच रहते है इनकी सोच को बहुत प्रभावित करता है..ये लोग मंत्र जाप या पूजा में भी बैठे हो ध्यान केंद्रित नही कर पाते,मोबाइल में या इधर-उधर के विचारों में खोये रहते है...ऐसी महिलाये 30 में से कम से कम 4 दिन सब्जी-दाल में नमक डालना भूल जाती है या कम डालती है..

2.कुंडली मे यदि केंद्र में एक भी ठोस ग्रह ना हो तो जातक को हर क्षेत्र में अन्य लोगो के अपेक्षा अधिक मेहनत करनी पड़ती है...ऐसे लोग भीड़ में खुद को बहुत असहज महसूस करते है..उनको कभी 10 लोगो के बीच बोलने को कहा जाये तो घबराहट होती है.Self-Confidence बहुत कम होता है..

3.केंद्र में जितने अधिक सौम्य ग्रह होंगे,जातक के विनम्र होने का आप उतना अनुमान लगा सकते हो..जितने अधिक क्रूर ग्रह होंगे जातक की वाणी और व्यवहार उतना अकड़ू होंगा...

4.जातक सुबह जितने जल्दी उठेगा,गुरु और बुध उतना बढ़िया प्रभाव देंगे..सूर्योदय तक उठे तो सूर्य भी बढ़िया फल देंगा..9-10 बजे उठे ग्रह ठीक फल नही देते..11 बजे या उसके बाद उठे तो दिन भर राहू और शनि आप पर हावी रहेंगे..

5.जातक सूर्यास्त के पहले जितना अधिक स्वच्छ पानी पियेगा,चंद्रमा अच्छे परिणाम देंगा...मंगल आपको परेशान कर रहा हो तो दूध में शहद डालकर पीना चालू कीजिये..गुरु को बल देना हो तो दूध में हल्दी/केशर डालकर पीजिए...इसी तरह शुक्र को बल देना है तो दूध के साथ अश्वगंधा लीजिए...आप जितनी अधिक कॉफी पियोगे राहू आप पर उतना ही हावी रहेगा,कभी गौर करना अतः लंबे समय तक कॉफ़ी नही पीनी चाहिए शौकीयतौर पर पीजिये..

6.योगकारक ग्रहो से संबंधित रंग के वस्त्र धारण करने की कोशिश करे...पैंट कोई भी चलेगा पर शर्त,t-shirt,Hairband,दुपट्टा आदि...जो ग्रह समस्या दे रहे उनके रंग इस्तेमाल कम से कम करे..संभव हो तो नैलपैंट भी योगकारक में से किसी एक ग्रह का (जिसका रंग भड़काऊ ना हो) वो प्रयोग करे...

7.मोबाइल या लैपटॉप पर सन्नी लियोन या शाहरुख खान की जगह संभव हो तो श्रीयंत्र या भगवानों की फ़ोटो रखे,मन शांत रहेगा..

8.उम्र के पड़ाव के हिसाब से ही ग्रह और उनके उपाय काम करते है अतः छोटे बच्चो और बुजुर्गों पर भी ये बात लागू होती है..इनको सिर्फ भगवान की भक्ति फायदा देती है..रत्न अपना पूरा प्रभाव इनके स्किन और रक्तप्रवाह के कारण नही दिखा पाते..जिस तरह यौन उत्तेजनाओं की गोली का जितना फायदा युवा को हो सकता है उतना फायदा ना तो किसी बच्चे को होगा ना ही किसी बुजुर्ग,यही सूत्र रत्नों के ऊपर लागू होता है...

9.ग्रहो से बलवान होता है समय(काल)...समय अच्छा हो तो ग्रह भी आपको बुरा फल नही देते और जब समय खराब हो तो योगकारक ग्रह भी आपको अकेला छोड़कर हिमालय में तपस्या करने चले जाते है या फिर "आउट ऑफ कवरेज मोड" पर चले जाते है सो समय कैसा भी हो भक्ति में अपना समय अवश्य लगाये..

दुख में स्मिरण सब करे,सुख में करे ना कोय..
जो सुख में भी स्मिरण करे,तो दुख काहे को होय...

व्यापार विदेश तक किन ग्रह स्थितियों में जाता है ?


व्यापार या कारोवार को जितना चाहे जातक अपनी मेहनत और लगन से उन्नति की और ले जा सकता है लेकिन इस सबके लिए जरूत होती है अच्छे भाग्य की और कुण्डली में व्यापार के अच्छे योगो का होना।भाग्य के अच्छा होने के लिए नवे भाव भावेश का शुभ और बनी होना जरुरी है तो व्यापार के लिए दसवे भाव का सप्तम भाव से संबंध होना क्योंकि दसवा और सातवाँ दोनों ही भाव व्यापार के है साथ ही दसवे भाव से व्यापार के प्रबल कारक बुध, सूर्य गुरु शनि सम्बन्ध होना व् अन्य ग्रहो का के बली होने से द्वितीय भाव/द्वितीयेश , एकादश भाव/एकादशेश का बली होने से या दशमेश दशम भाव से सम्बन्ध होने से व्यापार के योग बनते है।व्यापारिक सफलता के लिए बुधग्रह का बलवान होना विशेष जरूरी है सफल व्यापार/व्यवसायी जातको की कुंडली में अधिकतर बुध कन्या, मिथुन राशि में या वर्गोत्तम स्थिति में होता है या मित्र राशि में शुभ ग्रहो से द्रष्ट होता है और बुध की ऐसी स्थिति होना व्यापारिक सफलता के लिए जरूरी भी है।

अब प्रश्न यह है कि व्यापार/व्यवसाय विदेशो तक कैसे पहुँचता है विदेशो तक पहुँचकर कैसे उन्नति करता है।जब दशमेश या दसवे भाव का सम्बन्ध बारहवे भाव या बारहवे भाव के स्वामी से शुभ स्थिति में केंद्र त्रिकोण में बने या बनता है तब जातक का व्यापार विदेशो तक पहुँचता है क्योंकि बारहवां भाव विदेश दूरस्थ स्थानो का है और दसवा भाव व्यापार का दसवे भाव/दसवे भाव के स्वामी, बारहवे भाव/ बारहवे भाव के स्वामी के साथ सातवे भाव भावेश का सम्बन्ध होने पर विदेश में पहुँचे व्यापर में बहुत उन्नति और अच्छी सफलता मिलती है क्योंकि सातवाँ भाव साझेदारी व्यापार का है और व्यापार में साझेदारी बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है विदेशो से किये गये व्यापार में साझेदारी करनी होती है जब दो कई व्यापारिक पार्टिया आपस में समझोता करके व्यापार को सफल बनाती है तब व्यापार उन्नति करता है।

इस तरह व्यापार योग और ग्रह स्थितियां कुंडली में होने पर जब बलवान दसवे भाव या भावेश या दोनों का सम्बन्ध बलवान बारहवे भाव भावेश से बनता है तब व्यापार खूब उन्नति करता है।बारहवे भाव को ख़राब और नुकसान देने वाला भाव माना जाता है लेकिन यह व्यापारिक रूप से व्यापार के विस्तार करने में बहुत सहायक होता है।दशमेश दशम भाव, दशम भाव भावेश के साथ बैठे ग्रहो का बली सम्बन्ध तीसरा भाव/ भावेश से अपने देश में ही दूरस्थ शहर, राज्यो से व्यापार कराता है क्योंकि तीसरा भाव अपने देश में ही दूरस्थ स्थानों का भाव है।दसवे भाव भावेश के बारहवे भाव भावेश आदि के सम्बन्ध में यह बात महवपूर्ण होती कि नेसरिक रूप से दसवे और बाहरवें भाव भावेश का नैसर्गिक रूप से अशुभ योग या सम्बन्ध न बनाता हो साथ ही व्यापार के योग कुंडली में मजबूत हो तो व्यापार सुचारू रूप से ठीक तरह से उन्नति करता है।

व्यापार में वृद्धि के लिए कुंडली के योगकारक ग्रहो का तरह पहनना शुभ परिणाम देता है।दशमेश का रत्न विद्वान् ज्योतिषी की सलह से पहनकर दशमेश को बली करके व्यापार योग होने पर व्यापार को अच्छी मजबूती दी जा सकती है।इस तरह व्यापार के बली योग होने पर दसवे भाव/ भावेश का शुभ सम्बन्ध बारहवे भाव/भावेश से होने पर व्यापार विदेशो तक उन्नति करता है।

कुंडली में ग्रहों के भावों के आधार पर ही करें ये काम


1.कभी भी उच्च के ग्रहों का दान नहीं करना चाहिए और नीच ग्रहों की कभी पूजा नहीं करनी चाहिए।

2 .कुंडली में गुरु दशम भाव में हो या चौथे भाव में हो तो मंदिर निर्माणके लिए धन नहीं देना चाहिए यह अशुभ होता है और जातक को कभी भी फांसी तकपहुंचा सकता है।

3. कुंडली के सप्तम भाव में गुरु हो तो कभी भी पीले वस्त्र दान नहीं करने चाहिए।

4 .बारहवें भाव में चन्द्र हो तो साधुओं का संग करना बहुत अशुभ होगा। इससे परिवार की वृद्धि रुक सकती है।

5 .सप्तम/अष्टम सूर्य हो तो ताम्बे का दान नहीं देना चाहिए, धन की हानि होने लगेगी।

6. मंत्रोच्चारण के लिए शिक्षा-दीक्षा लेनी चाहिए क्योंकि अशुद्ध उच्चारण से लाभ की बजाय हानि अधिक होती है।

7. जब भी मंत्र का जाप करें उसे पूर्ण संख्या में करना जरूरी है।

8. मंत्र एक ही आसन पर, एक ही समय में सम संख्या में करना चाहिए।

9 .मंत्र जाप पूर्ण होने के बाद दशांश हवन अवश्य करना चाहिए तभी पूर्ण फल मिलता है।

10.कुछ लोग वार के अनुसार वस्त्र पहनते हैं, यह हर किसी के लिए सही नहींहोता है। कुंडली में जो ग्रह अच्छे हैं उनके वस्त्र पहनना शुभ है लेकिन जोग्रह शुभ नहीं हैं उनके रंग के वस्त्र पहनना गलत हो सकता है।

11. कईबार किसी से सलाह लिए बिना कुछ लोग मोती पहन लेते हैं, यह गलत है अगरकुंडली में चन्द्रमा नीच का है तो मोती पहनने से व्यक्ति अवसाद में आ सकताहै।

12. अक्सर देखा गया है कि किसी की शादी नहीं हो रही है तोज्योतिषी बिना कुंडली देखे पुखराज पहनने की सलाह दे देते हैं इसका उल्टाप्रभाव होता है और शादी ही नहीं होती।

13. कुंडली में गुरु नीच का, अशुभ प्रभाव में, अशुभ भाव में हो तो पुखराज कभी भी नहीं पहनना चाहिए।

14. कई लोग घर में मनी प्लांट लगा लेते हैं यहसुनकर कि इससे घर में धनवृद्धि होगी लेकिन तथ्य तो यह है कि अगर बुध खराब हो तो घर में मनी प्लांटलगाने से घर की बहन-बेटी दुखी रहती हैं।

15. कैक्टस या कांटे वालेपौधे घर में लगाने से शनि प्रबल हो जाता है अतः जिनकी कुंडली में शनि खराबहो उन्हें ऐसे पौधे नहीं लगाने चाहिए।